माघ मेला क्षेत्र में संत परंपरा के महान प्रवर्तक जगद्गुरु रामानंदाचार्य की 726 वीं जयंती 9 और 10 जनवरी को श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाई जाएगी। इस अवसर पर 9 जनवरी को शोभायात्रा निकाली जाएगी, जबकि 10 जनवरी को संत समागम और विशेष आयोजन होंगे। सतुआ बाबा के शिविर में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
खाक चौक व्यवस्था समिति के प्रधानमंत्री जगद्गुरु संतोष दास सतुआ बाबा ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जयंती समारोह में शामिल होने की सहमति प्रदान कर दी है। जयंती को लेकर माघ मेला क्षेत्र में तैयारियां तेज कर दी गई हैं और संत-महात्माओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। उन्होंने रामानंदाचार्य के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका जन्म माघ माह की सप्तमी, ईस्वी सन् 1299 में प्रयाग में कान्यकुब्ज ब्राह्मण कुल में हुआ था। उनके पिता का नाम पुण्य सदन शर्मा और माता का नाम सुशीला देवी था।
वशिष्ठ गोत्र से संबंधित होने के कारण वाराणसी के कुल पुरोहित द्वारा मान्यता के अनुसार जन्म के तीन वर्ष तक उन्हें घर से बाहर न निकालने तथा एक वर्ष तक दर्पण न दिखाने का विधान बताया गया था। जहां रामानंदाचार्य का जन्म हुआ, वह स्थान वर्तमान में श्री मठ प्राकट्य धाम के नाम से जाना जाता है। आठ वर्ष की आयु में उपनयन संस्कार के उपरांत उन्होंने वाराणसी के पंचगंगा घाट स्थित स्वामी राघवानंदाचार्य से दीक्षा ग्रहण की। कठोर तपस्या और गहन ज्ञानार्जन के पश्चात उनके विचारों और ज्ञान का प्रभाव बड़े-बड़े साधु-संतों और विद्वानों पर पड़ने लगा।
संतोष दास सतुआ बाबा ने बताया कि रामानंदाचार्य के उदार और समन्वयवादी विचारों से प्रभावित होकर मुमुक्षु जन उनके पास अपनी जिज्ञासा और आध्यात्मिक तृष्णा शांत करने आने लगे। उन्होंने भक्ति को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर समरसता का संदेश दिया। रामानंदाचार्य जयंती समारोह के दौरान संत प्रवचन, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा, जिससे माघ मेले का आध्यात्मिक वातावरण और अधिक भक्तिमय हो जाएगा।