सर्वेश्वरी समूह ने मौनी अमावस्या पर हुए हादसे के लिए पुलिस व मेला प्रशासन के अफसरों के कुप्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। सीएम योगी आदित्यनाथ को लिखे खत में संयुक्त मंत्री ने 28 जनवरी को ही पांटून पुलों को बंद करने और श्रद्धालुओं का रास्ता रोकने को हादसे की प्रमुख वजह बताई है। उन्होंने कार्रवाई की मांग भी की है।
सर्वेश्वरी समूह के सचिव मनीष कुमार सिंह ने सीएम को भेजे पत्र में 28 जनवरी की आपबीती लिखी है। कहा है, मेला प्राधिकरण की अनुमति से अघोरेश्वर भगवान राम की प्रभातफेरी निकाली जानी थी।
सुबह 5:30 बजे तीन हजार अनुयायियों के साथ सर्वेश्वरी ध्वज लेकर प्रभातफेरी प्रारंभ की गई। स्वीकृत रूट शंकराचार्य मार्ग, काली मार्ग से होते हुए यात्रा काली पांटून पुल पर बढ़ रही थी कि पांटून पुल-10 पर उन्हें रोक दिया गया।
पुलिस को अनुमति पत्र दिखाया, लेकिन उन्होंने पुल संख्या नौ की ओर मोड़ दिया। वहां पहुंचने पर करीब 40 मिनट तक यात्रा रोके रखी गई। इस बीच, भीड़ का दबाव बढ़ता रहा। पुलिस कर्मी कहते रहे कि हमें उच्चाधिकारियों से आदेश लेना है। पुलिस कंट्रोल रूम के जरिये आदेश मिले बिना वह यात्रा आगे नहीं जाने देंगे।
किसी तरह लोगों को निकाला गया। नंदी द्वार पर अमृत स्नान करके आठ बजे सेक्टर 18 के शिविर में लौटने को हुए तो पांटून पुल संख्या चार-पांच के बीच फिर रोक दिया गया। पुलिस वहां फंसे हजारों लोगों को जबरदस्ती संकरी जगह पर धकेल रही थी।
भीड़ को जबरन आगे बढ़ाने वाला एक आईपीएस अफसर भी वहां था। एक अन्य पुलिस अधिकारी लाउडस्पीकर पर पीछे हटने के लिए कह रहे थे, जबकि वहां कोई जगह नहीं थी।
वह आईपीएस अफसर सीआरपीएफ और आरएएफ की टुकड़ी लेकर हमलावर था। वैकल्पिक मार्ग बताए बिना उसने दो घंटे तक रोके रखा। किसी तरह जान बचाकर शिविर में पहुंचे।