आंखों में आंसू और चेहरे पर गहरा सदमा था। वह शांत बैठा भाई के चेहरे को निहार रहा था। जैसे उसकी आंखों से ही दर्द बोल रहा हो। छोटे भाई ने बताया कि दोनों रोज की तरह कॉलेज गए थे। दोपहर करीब 11 बजे लंच और खेल-कूद के दौरान कॉलेज में अचानक अफरातफरी मच गई। लोग दौड़ते हुए ऊपर की ओर भाग रहे थे और कुछ लोग चीखते चिल्लाते हुए नीचे उतर रहे थे।
इसी बीच किसी साथी से पता चला कि उसके भाई के दो सहपाठी चाकू मारकर भाग गए। वह भागते हुए छत पर पहुंचा तो देखा कि उसका बड़ा भाई खून से लथपथ पड़ा है। वह चीखते हुए उसके पास पहुंचा और उसे अपने हाथों में उठाया। छात्रों और शिक्षकों की मदद से अवनीश को सीएचसी करछना ले जाया गया। वहां गंभीर हालत होने पर रेफर किए जाने पर उसे एसआरएन अस्पताल भेजा गया।
रास्ते में दिग्विजय अपने भाई के सिर को गोद में रखकर भगवान से यही मनाता रहा कि किसी तरह से उसके भाई की जान बच जाए लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। वहीं जब छात्र की मौत की खबर मां और अन्य परिजनों तक पहुंची तो परिवार में कोहराम मच गया। इस दर्दनाक घटना के बाद कॉलेज से लेकर परिवार तक मातम पसरा रहा।
शिक्षकों की मौजूदगी में हुई छात्र की हत्या, सुरक्षा पर उठ रहे सवाल
करछना में इंदिरा गांधी इंटर कॉलेज में बुधवार सुबह हुई छात्र अवनीश पांडे (17) की हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। कॉलेज परिसर में शिक्षकों और विद्यार्थियों की मौजूदगी में हुई इस घटना से न केवल छात्र-छात्राएं बल्कि अभिभावक भी खौफजदा हैं। उधर कॉलेज में विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
छात्र और शिक्षकों की मौजूदगी के बावजूद नाबालिग छात्र चाकू लेकर परिसर में कैसे प्रवेश कर गए और इतनी भयावह घटना को अंजाम दे दिया, यह सवाल सभी की जुबान पर है। उधर, पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे रिश्तेदारों के बीच इस बात की भी चर्चा रही कि इसकी भी जांच होनी चाहिए कि घटना में नाबालिग छात्र क्यों शामिल हुए। क्या उनसे भी कोई विवाद था।
सवाल यह भी है कि अगर माहौल तनावपूर्ण था तो कॉलेज प्रबंधन को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। आरोप लग रहे हैं कि कॉलेज प्रबंधन समय रहते स्थिति को भांप गया होता तो शायद इतनी बड़ी घटना नहीं घटती। इस बाबत स्कूल प्रबंधक मनोज पांडेय से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उनका फोन लगातार बंद रहा।
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