95 फीसदी तक बिजली की होगी बचत
वर्तमान में कवरेज बढ़ाने के लिए जो रिले उपयोग होते हैं, वे एक्टिव डिवाइस हैं। इनमें कई आरएफ चेन (जैसे एम्पलीफायर, फिल्टर, मिक्सर आदि) होते हैं। इसके कारण इनकी डिजाइन जटिल होती है। इससे बिजली की खपत भी अधिक होती है। एक सामान्य रिले सिस्टम को काम करने के लिए 10 वॉट तक बिजली की आवश्यकता पड़ सकती है। वहीं, एचआरआईएस एक पैसिव डिवाइस है।
यह स्वयं सिग्नल उत्पन्न नहीं करती बल्कि उसे परावर्तित और नियंत्रित करती है। इसे केवल नियंत्रण सिग्नल के लिए ऊर्जा चाहिए जो कुछ मिलीवॉट से लेकर एक वॉट से भी कम हो सकती है। ऐसे में पारंपरिक रिले की तुलना में इस डिवाइस से लगभग 90 से 95 प्रतिशत तक बिजली की बचत होगी।
आरएसएमए आधारित मल्टीपल एक्सेस एल्गोरिदम और एचआरआईएस प्रोटोटाइप विकसित कर रहे हैं। एचआरआईएस को ऊंची इमारतों या टावरों पर लगाया जा सकता है। यह बिजली की ज्यादा खपत किए बिना सिग्नल को नियंत्रित करके लोगों तक हाई-स्पीड और स्थिर कनेक्शन पहुंचाने में मददगार साबित होगा। - डॉ. संदीप कुमार सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, ईसीई विभाग, एमएनएनआईटी