महाकुंभ में बनाए जा रहे पांटून ब्रिज।
- फोटो : अमर उजाला।
जगदीश रैंप मार्ग वाले पांटून पुल में अभी 15 से अधिक पीपे जोड़े जाने बाकी हैं। इसी तरह अरैल में सोमेश्वर महादेव के पास जहां विश्वस्तरीय सुविधाओं वाली वीआईपी टेंट सिटी बस रही है, वहां पांटून पुल-एक और दो का निर्माण नहीं हो सका है। इसी तरह पुल नंबर छह का भी निर्माण अधूरा है। पीडब्ल्यूडी के अभियंता भी स्वीकार कर रहे हैं कि अब तक आठ पुल नहीं बन सके हैं। मंगलवार को 30 में से सिर्फ नौ पांटून पुलों पर यातायात पाया गया। अरैल से फाफामऊ के बीच पांच कई पुल ऐसे हैं जिनके पीपे जोड़े जाने बाकी हैं।
अखाड़ा मार्ग और नागवासुकि मंदिर के सामने जिन पांटून पुलों को आवागमन के लिए खोला गया है, उनकी रेलिंग की रंगाई का काम अधूरा है। किसी भी पुल पर अब तक स्ट्रीट लाइट नहीं लगाई गई है।22 पांटून पुल बन गए हैं। 15 पांटून पुलों पर प्रमुख सचिव की गाड़ी भी चलवाकर दिखा दी गई है। बुधवार रात तक सभी 30 पांटून पुलों को चालू कर लिया जाएगा। - एके द्विवेदी, मुख्य अभियंता, पीडब्ल्यूडी
महाकुंभ में तैयार किए जा रहे पांटून ब्रिज।
- फोटो : अमर उजाला।
मुसीबत बनीं उखड़ी चकर्ड प्लेटें, ज्यादातर गाटा मार्गों पर सिर्फ रेत
महाकुंभ की बसावट के लिए पीडब्ल्यूडी की ओर से कराए जा रहे अस्थायी कार्यों का हाल बेहद खराब है। मुख्य मार्गों पर जहां बिना क्लैंपिंग के ही उखड़ी, मुड़ी और टेढ़ी चकर्ड प्लेटें हादसों का सबब बन गई हैं तो ज्यादातर गाटा मार्गों पर रेत उड़ रही है। पांटून पुलों के निर्माण का भी हाल लचर है। आधे-अधूरे काम मुंह चिढ़ा रहे हैं। संगम से लेकर दारागंज, सलोरी और झूंसी की तरफ काम की रफ्तार बहुत धीमी है। रेती पर तैयार हो रहे चकर्ड प्लेट मार्गों का हाल सबसे ज्यादा खराब है। मानक के विपरीत बालू डालकर बिछाई जा रही चकर्ड प्लेटें उखड़ जा रही हैं। ज्यादातर मार्गों की चकर्ड प्लेटों में क्लैंपिंग नहीं होने से वाहनों के बंफर टूटने के साथ ही क्लच वायर जलने लगे हैं।
अखाड़ा सेक्टर के अलावा कई सेक्टरों में साधु-संतों के शिविरों की बसावट में इससे दिक्कतें आ रही हैं। संगम लोवर मार्ग, मुक्ति मार्ग पूरी तरह तैयार नहीं हो सका है। हालत यह है कि अखाड़ा सेक्टर-18 के बाद सेक्टर 17 में तो बसावट दिख रही है, लेकिन सेक्टर-16,15 और 14 में बसावट बहुत ही धीमी होने से विश्वस्तरीय मेले की चमक पर असर पड़ने की आशंका है।
सेक्टर-13, 14 में गाटा मार्गों पर चकर्ड प्लेटें नहीं बिछी हैं। सेक्टर-12, 11 का हाल तो और भी खराब है। यहां अब तक मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच सकी हैं। न तो रास्ते हैं और ना ही बिजली-पानी और प्रसाधन की मुकम्मल व्यवस्था। इससे संत-भक्त परेशान हैं। सेक्टर-14 में मुख्य मार्ग पर चकर्ड प्लेट तो बिछा दी गई है, लेकिन उसे नट-बोल्ट से कसा नहीं गया। पानी का छिड़काव भी नहीं हो रहा। इससे वाहनों के गुजरने पर धूल उड़ रही है।
इन सबके बीच मेला प्रशासन समय से काम पूरा करने का दावा कर रहा है। संगम लोवर मार्ग, हर्षवर्धन, तुलसी, शंकराचार्य, मुक्ति मार्ग पर चकर्ड प्लेटें मामूली बालू के साथ बिछाने से दिक्कतें बढ़ गई हैं। चौराहों पर चकर्ड प्लेटों के बीच गैप होने से वाहन फंस रहे हैं। इन सड़कों पर भी क्लैंपिंग नहीं न होने से उखड़ी, मुड़ी और टेढ़ी हुई चकर्ड प्लेटें संतों-भक्तों के वाहनों केे लिए परेशानी का सबब बन गई हैं। मुख्य अभियंता एके द्विवेदी का कहना है कि कुल 651 किमी चकर्ड प्लेट मार्ग बनाए जाने हैं। इसमें से 390 किमी मार्ग का निर्माण पूरा कर लिया गया है।