-राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से प्रवेश शुल्क में छूट न दिए जाने की हुई थी शिकायत
-आयोग ने इविवि प्रशासन से दस दिनों के भीतर मांगी कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट
प्रयागराज। इविवि की प्रवेश परीक्षा में अन्य पिछड़ वर्ग (ओबीसी) के अभ्यर्थियों को प्रवेश शुल्क में रियायत न दिए जाने के मामले में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने इविवि प्रशासन को एक और पत्र जारी कर मामले में जवाब मांगा है। इससे पूर्व भी आयोग ने एक अभ्यर्थी की शिकायत पर इविवि को पत्र जारी किया था, जिसके बाद इविवि प्रशासन ने उस पत्र का जवाब दिया था, लेकिन आयोग जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और दोबारा पत्र जारी कर 10 दिनों के भीतर मामले में उचित कार्रवाई कर इसकी रिपोर्ट मांग ली।
इविवि के पुरा छात्र राघवेंद्र यादव ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराई थी कि इविवि प्रशासन नियमों का उल्लंघन करते हुए ओबीसी वर्ग के छात्रों से सामान्य वर्ग के छात्रों के बराबर शुल्क लेता है, जबकि ओबीसी वर्ग के छात्रों को शुल्क में रियायत दिए जाने का प्रावधान है। इस पर आयोग ने इविवि प्रशासन से जवाब मांगा था, जिसके बाद इविवि के रजिस्ट्रार की ओर से आयोग को पत्र भेजकर बताया गया था कि विवि में पिछले तीन वर्षों से सामान्य एवं ओबीसी वर्ग से एक समान प्रवेश शुल्क लिया जा रहा है। रजिसट्रार के पत्र में देश के कुछ अन्य प्रतिशिष्ठत संस्थानों का भी जिक्र था, जिनके बारे में बताया गया था कि इन संस्थानों में भी सामान्य एवं ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों से एक समान प्रवेश शुल्क लिया जाता है।
हालांकि, शिकायत करने वाले अभ्यर्थी राघवेंद्र यादव इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने पिछड़ा वर्ग आयोग को एक और पत्र लिखते हुए कहा कि ओबीसी वर्ग को प्रवेश शुल्क में रियायत दिए जाने का नियम भारत सरकार ने बनाया है। यूजीसी-नेट परीक्षा में यूजीसी की ओर से प्रवेश शुल्क में ओबीसी अभ्यर्थियों को रियायत दी जाती है। हैदराबाद विवि, जेएनयू समेत तमाम संस्थानों में भी ओबीसी वर्ग को प्रवेश शुल्क में रियायत दी जाती है। अब आयोग की ओर से इविवि प्रशासन को दोबारा पत्र जारी कर कहा गया है कि राघवेंद्र यादव इविवि प्रशासन के जवाब से संतुष्ट नहीं हैं। ऐसे में इस मामले को पूरी पारदर्शिता के साथ देखा जाए और इविवि प्रशासन 10 दिनों के भीतर इस मामले आयोग के समक्ष एक्शन टेकेन रिपोर्ट प्रस्तुत करे।