आंदोलन को याद करते हुए पूर्व सांसद की पत्नी यमुनोत्री गुप्ता बताती हैं कि उनके पति की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी। लेकिन, उन्होंने कारसेवकों के ठहरने से लेकर खाने-पीने सहित रास्ते के खर्च की भी व्यवस्था कराई थी।
अयोध्या आंदोलन के दौरान पूर्व सांसद श्यामा चरण गुप्त प्रयागराज के नगर प्रमुख थे। भाजपा में होने की वजह से मंदिर आंदोलन के दौरान तत्कालीन मुलायम सरकार ने उन्हें नजरबंद कर दिया था। फिर भी श्यामा चरण लगातार कारसेवकों को हर संभव मदद पहुंचा रहे थे। उन्होंने अपने आवास पर कारसेवकों के लिए भंडारा शुरू कर दिया। जो दस दिन तक चला। प्रशासन ने भंडारा बंद करने का दबाव भी बनाया। लेकिन उन्होंने कहा कि किसी को भोजन कराना कोई गुनाह नहीं है।
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आंदोलन को याद करते हुए पूर्व सांसद की पत्नी यमुनोत्री गुप्ता बताती हैं कि उनके पति की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी। लेकिन, उन्होंने कारसेवकों के ठहरने से लेकर खाने-पीने सहित रास्ते के खर्च की भी व्यवस्था कराई थी। घर पर 10-12 हलवाई बुलाए गए, राशन आदि की कमी नहीं थी। हलवाइयों से कह दिया गया था कि चूल्हा 24 घंटे चलना चाहिए।
इसके बाद शिफ्ट वाइज हलवाई कार सेवकों के लिए खाना बनाने में जुट गए। दस दिन कब बीत गए मालूम ही नहीं पड़ा। कारसेवकों पर जब गोली चलाए जाने की बात सामने आई तो सभी सहम गए। इस बात का डर था कि कहीं शहर में दंगा न हो जाए।
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तब डाॅ. मुरली मनोहर जोशी ने उनके पति से कहा कि आप कारसेवकों के खाने एवं रहने का उचित प्रबंध कीजिए। इस दायित्व को हम सभी ने बखूबी निभाया। विदुप अग्रहरि भी तब दिन रात कारसेवकों की सेवा में ही जुटे रहे। तमाम कारसेवकों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए रेल टिकट आदि का भी प्रबंध किया।