एलएलएम छात्रा से दुष्कर्म के मामले में आरोपी पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री चिन्मयानंद ने हाईकोर्ट में पेरोल के लिए अर्जी दाखिल की है। चिन्मयानंद की नियमित जमानत पर हाईकोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित रखा है।
जमानत पर फैसला आने तक उन्होंने कुछ समय के लिए रिहा किए जाने की मांग की है। अर्जी में चिन्मयानंद के खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर कहा गया है कि इनको इलाज कराने के लिए कुछ समय के लिए जेल से रिहा किया जाए अर्जी पर 27 जनवरी को सुनवाई होने की संभावना है।
एलएलएम छात्रा से दुष्कर्म करने के आरोपी चिन्मयानंद लंबे समय से जेल में बंद है। उनकी जमानत सेशन कोर्ट से खारिज हो चुकी है। हाईकोर्ट में दाखिल जमानत अर्जी पर 16 नवंबर 2019 को हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। फैसला अभी आया नहीं है। इस बीच रिहाई की मांग को लेकर के उन्होंने यह अर्जी दाखिल की है।
मॉनिटरिंग में पक्षकार नहीं बनेंगे चिन्मयानंद
एलएलएम छात्रा से दुराचार के मामले की मानीटरिंग कर रही इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा है कि सुप्रीमकोर्ट के निर्देश पर यह पीठ विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा की जा रही जांच की निगरानी कर रही है। वह पीड़िता और उसके परिवार को जरूरी सुरक्षा देने का आदेश देगी।
एसआईटी ने अपनी विवेचना पूरी कर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी है। इस स्तर पर मामले के आरोपी चिन्मयानंद को पक्षकार बनाने का कोई औचित्य नहीं है। उनकी पक्षकार बनाने की अर्जी अर्थहीन हो चुकी है। मामले की मॉनिटरिंग जस्टिस मनोज मिश्र और जस्टिस दीपक वर्मा की पीठ कर रही है। चिन्मयानंद ने इसमें पक्षकार बनाए जाने के लिए अर्जी दी थी।