एएमए में आयोजित चिन्मय मिशन के कार्यक्रम में प्रस्तुति देते बच्चे।
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दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरू हुआ कार्यक्रम
सांध्यकालीन 'अमृतांजलि' कार्यक्रम का शुभारंभ चिन्मय मिशन प्रयागराज के प्रमुख स्वामी मित्रानंद जी एवं स्वामी अभेदानन्द जी ने दीप प्रज्ज्वलन तथा वैदिक मंत्रोच्चार से किया। दीप प्रज्वलन के पश्चात प्रथम पूजित,विघ्नहर्ता श्री गणपति जी की स्तुति से संपूर्ण सभागार भक्तिमय हो उठा। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय संस्कृति के गौरव, आध्यात्मिक चेतना, श्रीमद्भगवद्गीता के जीवनोपयोगी मूल्यों से नई पीढ़ी को परिचित कराना व उन्हें प्रेरित करना था। चिन्मय नवीन सेवाश्रम न्यास, प्रयागराज की अध्यक्ष , चिन्मय मिशन प्रयागराज की उपाध्यक्ष और महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर विद्यालय समूह की सचिव डॉक्टर कृष्णा गुप्ता ने गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद जी का स्मरण करते हुए विस्तार पूर्वक स्वामी चिन्मयानंद के द्वारा अभिसिंचित चिन्मय मिशन के उद्देश्यों को स्पष्ट किया।
उन्होंने बताया कि पूज्य गुरुदेव ने वैज्ञानिक चेतना के आलोक में वेदांत के गहन ज्ञान को जन - जन तक पहुंचाने की दिव्य साधना की है और आज उनका यह संकल्प विश्व व्यापी होकर एक अभियान, एक परिवार , एक विश्व का पर्याय बन गया है । विद्यालय परिवार की ज्येष्ठ सदस्य होने तथा चिन्मय मिशन प्रयागराज की अध्यक्षा के रूप डॉक्टर कृष्णा गुप्ता जी ने हृदय पूर्वक मुख्य अतिथि के रूप में विराजमान पूज्य स्वामी मित्रानंद जी एवं पूज्य स्वामी अभेदानंद जी चिन्मय मिशन के अन्य गणमान्य अतिथियों एवं भक्तों का स्वागत करते हुए कहा कि अमृत महोत्सव का हिस्सा बनना महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर विद्यालय समूह का सौभाग्य है।
एएमए में आयोजित चिन्मय मिशन के कार्यक्रम में मौजूद अतिथिगण।
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चरैवेति चरैवेति को जीवन में परिभाषित करने पर जोर
स्वामी मित्रानंद ने अपने उद्बोधन विषय "ओ ! ट्रैवलर, यात्री चरैवेति" के माध्यम से वेदांत के इस सूत्र को स्पष्ट करते हुए कहा कि चरैवेति’ का निहितार्थ केवल निरंतर चलते रहने तक सीमित नहीं है, अपितु यह मनुष्य को उसके सकारात्मक लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सतत कर्मशील और संघर्षशील रहने का संदेश देता है। जीवन की विषम परिस्थितियाँ, अवरोध व असफलताएं व्यक्ति की परीक्षा लेती हैं लेकिन उसे अपने ध्येय-पथ से विचलित नहीं होना चाहिए। निरंतर प्रयास और पुरुषार्थ के द्वारा ही व्यक्ति अपनी अंतर्निहित क्षमताओं का विकास कर सकता है। जीवन को सार्थक बना सकता है। अतः ‘चरैवेति’ जीवन की निरंतर प्रगतिशील यात्रा का प्रतीक है—रुको नहीं, थको नहीं, निरंतर अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होते रहो। इसी क्रम में विद्यालय निदेशक श्री यशोवर्धन गुप्ता जी ने स्वामी अभेदानन्द जी को पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया।
इसी क्रम में पूज्य स्वामी अभेदानंद जी ने अपने संबोधन विषय "स्वामी चिन्मयानंद- द मैन मास्टर एंड द मिशन" के अंतर्गत आध्यात्मिक संस्था चिन्मय मिशन के संस्थापक के रूप में पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद के व्यक्तित्व, कृतित्व व आध्यात्मिक वृत्त से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि कठोर तपश्चर्या, तितिक्षा व त्यागपूर्वक की गई साधना से ही गुरुदेव को स्वामी चिन्मयानंद की परम पदवी प्राप्त हुई। पूज्य स्वामी अभेदानन्द जी ने स्पष्ट किया कि परमपूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद जी का जीवन नि:स्वार्थ सेवा, करुणा का प्रतीक है। ईश्वर पर गहरी आस्था मनुष्य को निर्भय बनाती है ; आत्मनियंत्रण मनुष्य को सरल व सहज बनाता है । कार्यक्रम का समापन चिन्मय मिशन की ब्रह्मचारिणी शाश्वती जी के आभार ज्ञापन करते हुए गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद जी के आदर्शों पर चलने के लिए प्रेरित किया।