हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पास मुकदमों की सुनवाई की व्यवस्था करने के अधिकारों पर पांच जजों की वृहद पीठ विचार करेगी। मुख्य न्यायाधीश की रोस्टर जारी करने, न्यायपीठों द्वारा मुकदमों को संबद्ध रखने या नहीं रखने का आदेश देने की शक्ति आदि प्रश्नोें पर विचार के लिए जस्टिस अरुण टंडन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने प्रकरण वृहद पीठ के लिए संदर्भित कर दिया है।
खंडपीठ द्वारा संदर्भित प्रश्नों में एक सवाल यह भी है किसी पीठ द्वारा याचिका की सुनवाई के दौरान यदि मुख्य न्यायाधीश उस न्यायपीठ का क्षेत्राधिकार बदल देते हैं तो याचिका उस क्षेत्राधिकार में आने वाली नई न्यायपीठ सुनेगी या फिर पूर्व से याचिका की सुनवाई करती आ रही न्यायपीठ ही उसकी सुनवाई आगे भी जारी रखेगी। क्या मुख्य न्यायाधीश सर्कुलर जारी कर रोस्टर के मुताबिक मुकदमों की सुनवाई की व्यवस्था कर सकते हैं।
इन सवालों पर जस्टिस अरुण टंडन की खंडपीठ का मानना है कि मुख्य न्यायाधीश के अधिकारों पर दो पूर्ण पीठों के निर्णयों में विरोधाभास है (चावली केस और संजय श्रीवास्तव केस)। हाईकोर्ट रूल्स के चैप्टर पांच नियम 14 के तहत मुख्य न्यायाधीश ‘टाइड अप’ (संबद्ध) और ‘पार्ट हर्ड’ (सुने जा रहे मुकदमे) को रोस्टर बदलने (मुकदमों का क्षेत्राधिकार) की स्थिति में सर्कुलर जारी रिलीज करने का आदेश दे सकते हैं।
प्रकरण एक आपराधिक अपील की सुनवाई को लेकर उठा। यह अपील कई बार न्यायपीठों को नामित की गई मगर सुनवाई के दौरान न्यायपीठों का क्षेत्राधिकार बदलने के कारण नई न्यायपीठ के समक्ष चली जाती है। इससे अपील की सुनवाई प्रभावित हो रही है और उसके निस्तारण में अधिक समय लग रहा है, जबकि मुख्य न्यायाधीश ने अपील के निस्तारण हेतु इसे टाइड अप रखने का आदेश दिया, मगर उन्हीं के द्वारा जारी एक सर्कुलर के तहत मुकदमों को टाइड अप नहीं रखने का भी निर्देश है, जिसकी वजह से यह पेच फंसा।