किसान नेता ने कहा कि खेती किसानी कभी घाटे सौदा नहीं रहा है। यह सरकार की एक तरह से साजिश है। सरकार चाहती है कि अगर अनाज का मूल्य सही नहीं मिलेगा और किसानों की लागत नहीं निकलेगी वह खेती को घाटे का सौदा समझेंगे और जमीन को बेच देंगे। सरकार की पॉलिसी को समझने की जरूरत है। किसान यूनियन को कमजोर करने के लिए कई संगठन बना दिए गए हैं। सरकार की हमेशा से नीति रही है फूट डालो और राज करो। किसान यूनियन को कमजोर करने की साजिश की जा रही है। सरकार व्यापारी चला रहे हैं जो दिखते नहीं हैं। देश को पहले हिंदू मुसलमान में बांटा अब किसानों को आपस में लड़ाकर उनकी लड़ाई को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाया जा सके।
किसानों को परेशान किया जा रहा है
राकेश टिकैत ने कहा कि माघ मेले में आयोजित किसान महापंचायत में आने वाले किसानों को परेशान किया जा रहा है। बृहस्पतिवार को छत्तीसगढ़ से आए किसानों को अलोपीबाग चुंगी से 200 मीटर दूर कार्यक्रम में आने के लिए नौ किलोमीटर घुमा दिया गया। मेले में भीड़ दिखाने के लिए किसानों और श्रद्धालुओं को इधर-उधर घुमाया जा रहा है।