किन्रर करते हैं विशेष श्रृंगार
कल्याणनंद गिरि ने बताया कि किन्नर भी सामान्य तरीके से श्रृंगार करते हैं लेकिन विशेष श्रृंगार करने में एक घंटे से अधिक समय लगता है। किन्नरों का विशेष श्रृंगार उनके जीवन का अहम हिस्सा है। उनकी पहचान और पूजा पद्धति का प्रतीक है, जिसमें वे स्वयं को मंदिर मानकर भव्य रूप धारण करते हैं। वे सिंदूर, चूड़ियां, और आभूषण पहनते हैं, विशेषकर बहुचरा माता और अरावन देवता के सम्मान में। जिसमें उनकी पवित्रता, तपस्या और जन कल्याण की भावना झलकती है।
किन्नर अपने शरीर को एक पवित्र मंदिर मानते हैं और उसे भव्य रूप में रखते हैं, जो उनके श्रृंगार का आधार है। वे अपनी मांग में सिंदूर भरते हैं, जो उनके गुरु की लंबी आयु और उनके कुलदेवी के प्रति समर्पण का प्रतीक है। आभूषण, वस्त्र, चूड़ियों आदि विशेष प्रयोग अपने श्रृंगार में करते हैं। किन्नरों का श्रृंगार उनके गुरु और कुलदेवी के प्रति प्रेम और समर्पण को दर्शाता है। श्रृंगार और रूप लोगों को आशीर्वाद देने और शुभता लाने का एक माध्यम है।