करीब एक महीने पहले पुलिस ने आरोपी अभ्यर्थी समेत आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। परिणाम में उत्तीर्ण घोषित होने पर मामला एक दिन पहले फिर चर्चा में आया। सूत्रों का कहना है कि ऐसा हुआ तो इसकी वजह प्रशासनिक अफसरों की लापरवाही है। यूं तो केंद्र प्रबंधन ऐसे मामलों में परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था को रिपाेर्ट भेजता है। इस मामले में अगर प्रधानाचार्य, प्रबंधक जेल चले गए थे तो कम से कम स्टैटिक मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट आयोग के पास भेजनी थी।
हालांकि इस मामले में तत्कालीन स्टैटिक मजिस्ट्रेट संदीप यादव से बात की गई तो उन्होंने साफ कह दिया कि रिपोर्ट केंद्र प्रबंधन को भेजी जानी चाहिए। लेकिन जब उनसे यह पूछा गया कि कॉलेज प्रबंधक व प्रधानाचार्य घटना के बाद ही जेल भेज दिए गए थे, ऐसे में उनकी ओर से रिपोर्ट क्यों नहीं भेजी तो वह गोलमोल बातें करने लगे।
आयोग पर भी उठ रहे सवाल
इस मामले में अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। दरअसल करेली इंस्पेक्टर रामश्रय यादव का दावा है कि विवेचना के दौरान परीक्षा कक्ष व अभ्यर्थियों के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए उसकी ओर से आयाेग अफसरों से पत्राचार किया गया था। इस दौरान एफआईआर की कॉपी भी भेजी गई थी। अब सवाल यह है कि जब एफआईआर की कॉपी भेजी गई तो आयोग ने इसका संज्ञान क्यों नहीं लिया।
अब तक क्या हुआ
- 31 जुलाई 2022 को करेली थाने में परीक्षार्थी रितू सिंह समेत नौ पर दर्ज की गई एफआईआर
- प्रधानाचार्य शबनम परवीन, उसके बेटे कसान व शाबान, कक्ष निरीक्षक हुमा बानो व गिरिराज गुप्ता भेजे जा चुके हैं जेल
- परीक्षार्थी व मालाधारी यादव व महाबीर सिंह की गिरफ्तारी पर कोर्ट से है रोक
- कुल आठ के खिलाफ दाखिल हो चुकी है चार्जशीट
- तीन आरोपी सलीम, पौरुष व खुरेश चल रहे हैं फरार