इलाहाबाद (ब्यूरो)। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एमबीए पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब इसमें कंपनियों की नीतियों और जरूरतों को भी महत्व दिया जाएगा। नए पाठ्यक्रम में व्यवहारिक ज्ञान को भी अधिक महत्व दिया जाएगा। इसके लिए विशेषज्ञों के अलावा उद्यमियों से मदद मांगी गई है।
मोनिरबा में संचालित एमबीए पाठ्यक्रम के सिलेबस में बदलाव की मांग काफी समय से की जा रही है। अब उसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसमें नई सरकार की नीतियों का भी असर दिखेगा। संस्थान के शिक्षकों का कहना है कि केंद्र में सरकार बदलने के बाद इंडस्ट्री, बीमा आदि क्षेत्रों की नियमावली में तो व्यापक फेरबदल हुआ ही है, बाजार की कार्यपद्धति में भी व्यापक बदलाव तय है। इसलिए भावी प्रबंधकों को इन बदलावों को ध्यान में रखकर प्रशिक्षित करने की जरूरत होगी। इसके अलावा वर्तमान में चार सेमेस्टर में जो पढ़ाई होती है
उनमें से कई टॉपिक अब महत्वपूर्ण नहीं रह गए हैं। इन्हीं को ध्यान में रखकर सिलेबस में बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नए पाठ्यक्रम का खाका कार्यशाला में तैयार किया जाएगा। वाणिज्य विभाग के अध्यक्ष प्रो. जेएन भार्गव ने बताया कि उद्यमियों की ओर से उनके अनुसार पाठ्यक्रम में बदलाव की मांग की जाती रही है। इसके मद्देनजर कार्यशाला में प्रमुख उद्यमियों को आमंत्रित किया जाएगा। इनके अलावा देश भर के प्रमुख प्रबंधन संस्थान के विशेषज्ञ भी कार्यशाला में शामिल होंगे। उनके सुझाव के आधार पर सिलेबस में बदलाव किया जाएगा। फिर उसे बोर्ड ऑफ स्टडीज और फैकेल्टी बोर्ड के सामने रखा जाएगा।