इसरो के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में लगाई नई छलांग
इस अभियान के दौरान कई रेअर अर्थ एलीमेंट (जो पृथ्वी पर असानी से उपलब्ध नहीं होते) भी मिलने की उम्मीद है, जिनकी खोज से भारत बुलंदियों को छू सकता है। प्रज्ञान रोवर में अल्फा पार्टीकल सेंसर भी है, जो प्लाज्मा का अध्ययन कर कई महत्वपूर्ण जानकारियां भेजेगा। चंद्रयान पर ऐसा सेंसर भी लगा हुआ है जो यह जानकारी भेजेगा कि सॉफ्ट लैंडिंग के दौरान चांद की सतह पर कंपन की क्या स्थिति थी।
इविवि के भौतिक विज्ञान के प्रो. केएन उत्तम का कहना है कि इसरो के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष विज्ञान में नई छलांग लगाई है। दुनिया भर में भारत की यह सबसे बड़ी उपलब्धि है। आने वाले समय में चांद पर अंतरिक्ष कारखाने (स्पेस मिल) की स्थापना और कॉलोनी बसाने की दिशा में भी काम हो सकेगा। चांद के दक्षिणी ध्रुव में हाइड्रोजन के आइसाेटॉप मिलते हैं, जो हवा में तैरते रहते हैं। इनसे न्यूक्लियर रिएक्टर बन सकते हैं, जिससे बिजली का उत्पादन किया जा सकता है। माइक्रो तरंगों के माध्यम से इन्हें पृथ्वी तक लाने का प्रयास भी होगा।