इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ.डीवाई चंद्रचूड का कार्यकाल उनके ऐतिहासिक फैसलों और न्यायपालिका में सुधार को लेकर किए गए गंभीर प्रयासों के लिए याद रखा जाएगा। मानवीय संवेदना से परिपूर्ण उनके निर्णयों ने जहां प्रदेश की जनता को राहत दी वहीं कई मौकों पर सरकार की मनमानी पर भी रोक लगाई। अपने पूरे कार्यकाल के दौरान वह न्यायपालिका में सुधार और सुविधाएं बढ़ाने के लिए प्रयासरत रहे तो जहां कहीं भ्रष्टाचार का मामला सामने आया, कठोर फैसले लेने से भी नहीं चूके।
अपने सौम्य व्यक्तित्व और सबको पूरी बात कहने का मौका देने के कारण न्यायमूर्ति चंद्रचूड वकीलों के बीच खासा लोकप्रिय भी रहे, यही कारण है कि सुप्रीमकोर्ट जज के लिए उनका नाम प्रस्तावित होने की सूचना पर अधिवक्ताओं को खुशी के साथ इस बात की कसक भी है कि अब वह एक न्यायप्रिय और बेहद सौम्य जज के सानिध्य से वंचित रह जाएंगे।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति के रूप में 31 अक्तूबर 2013 को शपथ ग्रहण करने के बाद जस्टिस चंद्रचूड ने एक के बाद एक कई ऐतिहासिक निर्णय दिए जो लंबे समय तक याद रखे जाएंगे। पौने दो लाख शिक्षामित्रों के समायोजन को नियमविरुद्ध करार देते हुए उसे रद्द करने का निर्णय पूरे देश में चर्चा में रहा तो वहीं सूबे के भर्ती आयोगों में मनमाने तरीके से अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के सरकार के फैसले को कड़ी न्यायिक समीक्षा से गुजरना पड़ा। जस्टिस चंद्रचूड की अध्यक्षता वाली पीठों ने लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष अनिल यादव, उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के अध्यक्ष, सदस्यों और माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड के अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्तियां रद्द करते हुए सरकार को नियुक्तियों में शुचिता और पारदर्शिता बरतने के लिए बाध्य किया।
पंचायत चुनाव के दौरान याचिकाओं में हस्तक्षेप से इंकार करते हुए उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया जारी रखने पर भरोसा जताया। जस्टिस चंद्रचूड की अध्यक्षता मेें सात जजों की खंडपीठ ने कई ऐतिहासिक निर्णय दिए। याचिका के जरिए सूबे की अधीनस्थ न्यायपालिका में सुरक्षा और मूलभूत ढांचे में सुधार के लिए कई दूरगामी आदेश भी पारित किए गए। पीठ अब भी मॉनिटरिंग कर रही है।
जस्टिस चंद्रचूड ने जनहित याचिकाओं पर तमाम ऐसे फैसले दिए हैं जिनसे आम जनता और पीड़ितों को बड़ी राहत मिली है। वाराणसी में रेप पीड़ित बच्ची को लेकर गुड़िया संस्था की याचिका पर उन्होंने पीड़िता के इलाज और मुआवजे का आदेश दिया। सुरेद्र कोली की फांसी को उम्रकैद में तब्दील करने का निर्णय भी ऐतिहासिक रहा। हर थाने में महिला पुलिस कर्मियों की मौजूदगी, सूबे के तमाम शहरों में पार्कों पर अवैध कब्जे रोकने का आदेश देकर उन्होंने पर्यावरण के प्रति भी अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया।
जस्टिस चंद्रचूड ने न्यायपालिका को साफ-सुथरा रखने की दिशा में भी कई अहम और कठोर निर्णय लिए। रेस्टोरेंट में हंगामा करने वाले 11 प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों की बर्खास्तगी और 15 अपर जिला जजों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति जैसे कई प्रशासनिक स्तर के निर्णयों से उन्होंने जाहिर कर दिया कि गलतियों पर कार्रवाई करने में न्यायपालिका सबसे आगे है।
हाईकोर्ट के 150 वें स्थापना दिवस समारोह का सफल आयोजन भी जस्टिस चंद्रचूड की ऐतिहासिक उपलब्धियों में शुमार रहेगा। इलाहाबाद और लखनऊ पीठ में हुए भव्य समारोह हाईकोर्ट के इतिहास में याद रखे जाएंगे।
प्रदेश का लोकायुक्त नियुक्त करने को लेकर सरकार की मनमानी रोकने में भी जस्टिस चंद्रचूड ने दृढ़ता दिखाई। सरकार द्वारा प्रस्तावित एक ही नाम को खारिज करते हुए उन्होंने साफ कर दिया कि नियुक्तियों में शुचिता और पारदर्शिता बरतनी होगी। अंतत: मामला तय करने के लिए सुप्रीमकोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा।
जस्टिस चंद्रचूड ने जनहित याचिकाओं के माध्यम से इलाहाबाद शहर को भी तमाम सौगातें दी हैं। कंपनी बाग के सुंदरीकरण को लेकर उनके आदेश से शहरवासियों को एक बेहतरीन पार्क का तोहफा मिल सका। इलाहाबाद में नागरिक हवाई अड्डे को लेकर दाखिल जनहित याचिका से शहर को नागरिक हवाई अड्डा मिलने का रास्ता साफ हो सका। शहर की सफाई व्यवस्था की पीआईएल के जरिए मॉनिटरिंग, कॉल्विन अस्पताल के उच्चीकरण, ईट भट्ठों को बिना पर्यावरण की मंजूरी के संचालन पर रोक लगाकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति उन्होंने न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को भी जाहिर किया।