उस दिन चंद्रशेखर आजाद के कटरा स्थित ठिकाने से निकलकर अल्फ्रेड पार्क तक पहुंचने की घटना भी कम हैरतअंगेज नहीं है। आजाद के करीबी रहे कोटवां निवासी क्रांतिकारी शिवमूर्ति सिंह के पौत्र सुबोध कुमार सिंह बताते हैं कि उस दिन आजाद अल्फ्रेड पार्क में क्रांतिकारी सुखदेव राज से मिलने गए थे। वह अपने दादा की सुनाई इस कहानी को आज भी अपने जेहन में संजोए हैं।
वह बताते हैं कि इससे पहले आजाद की मुलाकात उनके दादा शिवमूर्ति सिंह और सुरेंद्र पांडेय से कटरा के उस मकान में हुई थी, जिसमें वह रहा करते थे। सुरेंद्र पांडेय और शिवमूर्ति चौक में स्वेटर खरीदने निकले थे और आजाद सुखदेव राज से मिलने के लिए। उस दौर के क्रांतिकारी यशपाल ने भी अपनी पुस्तक में इस घटना का उल्लेख किया है। यशपाल लिखते हैं कि आजाद को दूसरे दिन ही रूस के लिए निकलना था, क्योंकि उस समय रूस ही क्रांतिकारियों को शरण देने वाला देश था।
रूस जाने की तैयारी जारी थी। 27 फरवरी 1931 की सुबह सुरेंद्र पांडेय और खुद यशपाल स्वेटर खरीदने के लिए कटरा से चौक जाने के लिए तैयार हुए। आजाद ने तब उनसे कहा था कि मुझे अल्फ्रेड पार्क में किसी से मिलना है, साथ ही चलते हैं। तुम लोग आगे निकल जाना। वह तीनों अल्फ्रेड पार्क के सामने से साइकिलों पर जा रहे थे। एक साइकिल से सुखदेव राज पार्क में जाते दिखाई दिए। रूस यात्रा से पहले इलाहाबाद में चंद्रशेखर आजाद की आखिरी बैठक थी।