इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के वीसी ने कहा कि वे इस्तीफा देने को हैं तैयार
इलाहाबाद। हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना करने पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू पर कोर्ट की अवमानना का आरोप तय किया जाएगा। कुलपति पर विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ मिनरोलॉजी एंड पेट्रोलॉजी में निदेशक की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी करने के हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना करने का आरोप है। अवमानना याचिका पर अदालत द्वारा समय दिए जाने के बावजूद कुलपति ने आदेश का पालन नहीं किया और न ही कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुए। इस अवहेलना को गंभीरता से लेते हुए न्यायमूर्ति पंकज नकवी ने कुलपति को आठ सितंबर को चार्ज फ्रेम करने के लिए तलब कर लिया है।
आलोक कृष्ण गुप्ता ने कुलपति के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि इविवि में डिपार्टमेंट ऑफ मिनरोलॉजी एंड पेट्रोलॉजी की स्थापना वर्ष 1995 में की गई थी। इस प्रतिष्ठित संस्थान में काफी मंहगे और संवेदनशील उपकरण रखे हैं। निदेशक का पद 2011 से रिक्त चल रहा है। इसे लेकर हाईकोर्ट में दो बार जनहित याचिका दाखिल की गई। कोर्ट ने आठ सितंबर 2015 और 11 दिसंबर 2015 को विश्वविद्यालय को आदेश दिया था कि दो माह के भीतर निदेशक के पद पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया जाए। रजिस्ट्रार की ओर से हलफनामा दाखिल कर विज्ञापन जारी करने का आश्वासन भी दिया गया।
इसके बावजूद आज तक विज्ञापन जारी नहीं किया गया। हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए 26 जुलाई 2016 को कुलपति को आदेश के पालन का एक और अवसर दिया था। इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं हुआ। विश्वविद्यालय द्वारा पूर्व का आदेश वापस लेने के लिए 27 जुलाई को रिकॉल की अर्जी दाखिल की गई। हाईकोर्ट ने इसे स्पष्ट अवमानना मानते हुए कुलपति को आरोप तय करने के लिए तलब किया है।