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नेहरू की कर्मस्थली में भाजपा के सामने सीट बचाने की चुनौती

Sun, 24 Dec 2017 01:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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नगर निगम का चुनाव बीतते ही फूलपुर उपचुनाव की तैयारी शुरू हो गई है। चुनाव फरवरी के आखिरी हफ्ते या मार्च के पहले पखवारे में संभावित है। यानी, इसके लिए मात्र दो माह का वक्त बचा है। ऐसे में प्रशासन के साथ राजनीतिक दलों ने भी तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि, अब तक किसी भी दल ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन सियासी गुणा-गणित साधने के साथ बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने की लड़ाई शुरू हो चुकी है।
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उपचुनाव में भाजपा के सामने अपनी सीट बचाए रखने की सबसे बड़ी चुनौती होगी तो कांग्रेस पंडित जवाहर लाल नेहरू की कर्मस्थली में वापसी के लिए पूरा जोर लगाएगी। भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता के साथ किसी बड़े नेता के नाम पर सहमति की भी कवायद शुरू है। शरद यादव, प्रमोद तिवारी समेत कई नाम सामने भी आ चुके हैं। विपक्ष की यह रणनीति सफल हुई तो भाजपा की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

फूलपुर सीट प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफा से खाली हुई है। उन्होंने भारी मतों के अंतर से जीत हासिल की थी और पं. नेहरू की इस सीट पर पहली बार कमल खिला। इसके बाद इसी साल हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इस लोकसभा की सभी पांच सीट फाफामऊ, सोरांव, फूलपुर, शहर उत्तरी तथा पश्चिमी पर जीत हासिल की। इसके बाद नगर निगम चुनाव में भी पार्टी ने अन्य दलों को पीछे छोड़ दिया। भाजपा इस जीत के सिलसिले को उपचुनाव में भी जारी रखने के लिए हर कोशिश में जुटी है। हालांकि, पार्टी टिकट के लिए दावेदारों की लंबी सूची है, लेकिन विपक्षी रणनीति के काट के तौर पर भाजपा चौंकाने वाला फैसला ले सकती है। सियासी गलियारे में बहुत तेजी से चर्चा है कि सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू प्रेरणा को भाजपा उम्मीदवार बना सकती हैं। इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि केशव प्रसाद के परिवार के किसी सदस्य को ही उम्मीदवार बनाया जाएगा। दीपावली के समय केशव के पुत्र योगेश मौर्य के जगह-जगह लगे होर्डिंग्स से इस चर्चा को और बल मिला है। जातीय समीकरण को देखते हुए कई अन्य नाम भी चर्चा में हैं।
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लगातार जीत के घोड़े पर सवार भाजपा को रोकने के लिए विपक्ष बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मैजिक तोड़ने के लिए विपक्ष किसी बडे़ नाम की तलाश में हैं। इसमें जनता दल युनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे शरद यादव और कांग्रेस के प्रमोद तिवारी का नाम सबसे ऊपर बताया जा रहा है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार शरद यादव की राज्यसभा की सदस्यता खत्म हो गई है। ऐसे में उनके नाम पर आम सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। वहीं पार्टी का शीर्ष नेतृत्व पं. नेहरू की इस सीट पर वापसी के लिए वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी को मैदान में उतारने पर विचार कर रहा है।

पार्टी नेताओं का कहना है कि शरद यादव मूलत: समाजवादी नेता हैं तो प्रमोद तिवारी भी सपा के समर्थन से राज्यसभा में पहुंचे हैं। ऐसे में इन पर सपा भी सहमत हो जाएगी। हालांकि, प्रमोद तिवारी चुनाव लड़ने की किसी संभावना से इंकार कर चुके हैं। इनके अलावा शहर उत्तरी से विधायक रहे अनुग्रह नारायण सिंह पर भी आम सहमति बनाने की कवायद जारी है। इसके लिए सपा के ही एक वरिष्ठ तथा सर्वमान्य नेता प्रयासरत हैं। हालांकि, सपा के नेता चुनाव की किसी रणनीति पर बोलने के लिए तैयार नहीं है। सपा जिलाध्यक्ष कृष्ण मूर्ति यादव का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बूथवार संगठन को मजबूत करने का निर्देश दिया है। पार्टी नेतृत्व की ओर से इसके अलावा कोई और निर्देश नहीं है। राज्यसभा सांसद रेवती रमण सिंह का कहना है कि हर संभावना है, आठ से 10 दिन में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। पार्टी चुनाव लड़ने की तैयारी में है।

नगर निगम चुनाव में भी कांग्रेस और सपा के बीच गठबंधन के प्रयास हुए थे। मेयर की सीट सपा तथा लोकसभा की कांग्रेस को देने पर सहमति बनाने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। खास यह कि दोनों दल के प्रत्याशी मजबूती से लड़े और तकरीबन बराबर मत पाए। सपा में यह चर्चा है कि कांग्रेस ने उम्मीदवार न उतारा होता तो सपा प्रत्याशी विनोद चंद्र दुबे के पक्ष में बने माहौल का लाभ मिलता। दोनों दलों के बीच नगर निगम की यह तल्खी लोकसभा चुनाव में विपक्षी एकता की उम्मीद को झटका दे सकती है।

बसपा अध्यक्ष मायावती के भी फूलपुर उपचुनाव लड़ने की चर्चा है। हालांकि, बसपा उपचुनाव नहीं लड़ती, लेकिन नगर निगम चुनाव के बाद बदले सियासी माहौल में पार्टी की ओर से उम्मीदवार उतारे जाने की चर्चा को बल मिल रहा है। नगर निकाय में बसपा के दो मेयर चुने गए हैं तो पालिका और नगर पंचायत चुनाव में भी पार्टी सपा और कांग्रेस से आगे रही। लोकसभा और विधानसभा में कमजोर प्रदर्शन करने वाली बसपा के लिए इसे संजीवनी के रूप में देखा जा रहा है। कहा जा रहा है कि इस माहौल को भुनाने के लिए बसपा दोनों लोकसभा की उपचुनाव में उम्मीदवार उतार सकती है और फूलपुर से स्वयं मायावती दावेदारी कर सकती हैं।

फूलपुर लोकसभा के कुछ प्रमुख तथ्य
0 कुल पांच विधानसभा फाफामऊ, सोरांव, फूलपुर, उत्तरी, पश्चिमी
0 पांचों विधानसभा में भाजपा या गठबंधन के विधायक
0 कुल 1933569 मतदाता हैं। (संशोधन के बाद घट-बढ़ सकते हैं)
0 कुल बूथों की संख्या 2154। 1000 पुरुष पर 818 महिला मतदाता

भाजपा ने फूलपुर उपचुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। संगठन मंत्री रत्नाकर ने पांचों विधानसभा के पदाधिकारियों के साथ शनिवार को सरकिट हाउस में बैठक की। उन्होंने बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने के साथ पार्टी की जीत के सिलसिले को जारी रखने की अपील की। सोनभद्र के विधायक भूपेश चौबे को फूलपुर लोकसभा का संयोजक बनाया गया। बैठक में क्षेत्र महामंत्री रामचंद्र मिश्रा, विधायक प्रवीण पटेल, महानगर अध्यक्ष अवधेश गुप्ता, अमरनाथ तिवारी, संजय गुप्ता, कविता पटेल, निर्मला पासवान, कमला सिंह, शशि कुंज बिहारी मिश्रा, श्याम चंद गिरि, पवन श्रीवास्तव, सुरेंद्र चोधरी, पवन केसरवानी, विपुल मित्तल, विशाल अग्रवाल आदि मौजूद रहे।

फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में बोर्ड की परीक्षाओं को भी ध्यान में रखना होगा। हालांकि अन्य बोर्ड ने अभी परीक्षा कार्यक्रम जारी नहीं किया है लेकिन यूपी बोर्ड ने छह फरवरी से एग्जाम कराने की घोषणा की है। हाईस्कूल की परीक्षा 22 फरवरी तथा इंटरमीडिएट की 10 मार्च को खत्म होगी। इसके विपरीत 22 मार्च से पहले उपचुनाव हो जाने हैं। ऐसे में 10 से 22 मार्च के बीच चुनाव की संभावना है। इससे पहले मतदान के लिए उस तिथि को चुनना होगा जब, उसके आगे और बाद की तारीख में भी परीक्षा न हो।
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