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अध्यक्ष, सदस्यों की आयु 65 साल करने की मांग

Sun, 18 Dec 2016 02:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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राज्य लोक सेवा आयोगों के राष्ट्रीय सम्मेलन की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में अध्यक्ष और सदस्यों की अधिकतम आयु सीमा 62 से 65 साल किए जाने की मांग की गई। बैठक में मौजूद आठ राज्य आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों ने राजनीतिक हस्तक्षेप खत्म करने तथा निष्पक्ष भर्ती के लिए आयोग तथा अध्यक्ष एवं सदस्याें का अधिकार बढ़ाने का प्रस्ताव भी पारित किया। राज्य आयोगों का राष्ट्रीय सम्मेलन फरवरी में गुजरात में प्रस्तावित है। उसमें बैठक की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के साथ मांग की पूर्ति के लिए आगे की प्रक्रिया पर चर्चा की जाएगी। शहर में शनिवार को हुई बैठक में गुजरात सम्मेलन के एजेंडे पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
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अध्यक्ष और सदस्यों का कहना था कि राज्य लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणालि भी संघ लोक सेवा आयोग की तरह है। इसलिए संघ लोक सेवा आयोग की तरह राज्य आयोगों के अध्यक्ष और सदस्यों की आयु भी 65 साल की जानी चाहिए। इसके समर्थन में उन्होंने कई अन्य तर्क भी रखे। स्टैंडिंग कमेटी के चेयरपर्सन केएस तोमर ने बताया कि  पूर्व की यूपीए सरकार ने इस पर सहमति जता दी थी। इसे संसद में भी रखा गया, लेकिन चर्चा नहीं हो पाई। अब फिर से इसके लिए प्रयास शुरू किए गए हैं। तोमर ने बताया कि अलग-अलग राज्य लोक सेवा आयोग, अध्यक्ष और सदस्यों के अधिकार, नियुक्ति की प्रक्रिया में भिन्नता है। इसके अलावा केंद्र सरकार की ओर से राज्य लोक सेवा आयोग के संबंध में कोई स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं है। ऐसे में संबंधित राज्य सरकारें आयोगों से अपनी सुविधा के अनुसार व्यवहार करती हैं।

कुछ राज्यों में तो अध्यक्ष और सदस्यों की सेवा शर्तों के संबंध में भी कोई निर्देश नहीं है। इस परिप्रेक्ष्य में न्यायालय की तरह आयोगाें तथा अध्यक्ष और सदस्यों को भी संवैधानिक संरक्षण तथा अधिकार दिए जाने की मांग उठी। ताकि, भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया जा सके। बैठक में अध्यक्ष और सदस्यों पर मुकदमा दर्ज करने के पूर्व एक जांच कमेटी का गठन सुनिश्चित करने की भी मांग उठी, जिसका स्वरूप हाईकोर्ट में अपनाई गई व्यवस्था जैसा हो। बैठक में अध्यक्ष और सदस्यों के वेतन, भत्ते में एकरूपता, इसके निर्धारण के लिए नियमावली बनाने, आयोग का वित्तीय अधिकार बढ़ाने समेत कई प्रस्ताव पारित किए गए।
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तोमर ने बताया कि  बैठक की रिपोर्ट गुजरात सम्मेलन में रखी जाएगी। साथ ही मांग पूरी कराने के लिए रणनीति पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति के पास इसका प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने बताया कि आयोग में कैशलेस कार्यप्रणालि विकसित करने पर भी सहमति बनी। आयोग की भर्तियों में पारदर्शिता से संबंधित कई अन्य प्रस्तावों पर भी सहमति बनी। 

इससे पहले उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष डॉ.अनुरूद्ध यादव ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन डॉ.रंजना त्रिपाठी ने किया। बैठक में तेलंगाना आयोग के अध्यक्ष प्रोफेसर घंटचक्रपाणि, गुजरात के दिनेश दास, छत्तीसगढ़ के आरएस विश्वकर्मा, हरियाणा के मनबीर सिंह भदाना, असम के डॉ.अनुपम कुमार राय, जम्मू एंड कश्मीर के सुरेश कुमार शर्मा, कर्नाटक के डॉ.बीएस प्रसाद, संघ लोक सेवा आयोग के अनुसचिव दीपक कोचर, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के सदस्य डॉ.एसके जैन, मेजर संजय यादव, डॉ.जयराम प्रसाद वैद्य, प्रोफेसर देवी प्रसाद द्विवेदी, एके गुप्ता, दुर्गा चरण मिश्र, सचिव अटल कुमार राय, परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ, संयुक्त सचिव डॉ.बिपिन कुमार मिश्र, सत्य प्रकाश आदि मौजूद रहे।

राज्य लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली पर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं। पेपर आउट होने के अलावा उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के चेयरमैन की नियुक्ति रद्द करने, पंजाब आयोग के अध्यक्ष को सजा होने समेत आयोग की भर्तियों में गड़बड़ी के आरोपों के सवाल पर केएस तोमर ने कुछ भी बोलने से मना कर दिया। हालांकि, उन्होंने इतना जरूर स्वीकार किया कि राष्ट्रीय सम्मेलन में ऐसे मुद्दों पर भी चर्चा होती है, लेकिन गोपनीय तथा आंतरिक मामला बताते हुए उन्होंने इससे अधिक बोलने से मना कर दिया।
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