केंद्र सरकार अगर प्रदेश सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए गेहूं खरीद में गुणवत्ता को लेकर दस फीसदी तक की छूट दे भी देती है तो इससे किसानों को खास राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। सोमवार को इलाहाबाद आई भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की केंद्रीय टीम ने इलाहाबाद से गेहूं के नमूने लेने के बाद स्थानीय अफसरों के साथ जो चर्चा की, उससे यही सकेंत मिल रहे हैं कि क्रय केंद्रों में गेहूं बेचने में भी किसानों को बड़ी चुनौती का सामना करना होगा। फिलहाल केेंद्रीय टीम इलाहाबाद मंडल से दस नमूने लेकर रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजेगी। इनमें इलाहाबाद जिले से लिए गए तीन नमूने भी शामिल हैं।
जिले में खाद्य विभाग, पीसीएफ, यूपीएसफ, यूपी एग्रो, कर्मचारी कल्याण निगम और भारतीय खाद्य निगम के 73 गेहूं क्रय केंद्र खोले जा चुके हैं। इसके अलावा नौ अन्य समितियों की ओर से भी खाद्य विभाग को क्रय केंद्र खोलने के लिए प्रस्ताव दिया गया है। मंडी में तो गेहूं की थोड़ी बहुत आवक शुरू हो चुकी है लेकिन क्रय केंद्रों में अभी सन्नाटा पसरा हुआ है। इसी वजह से तमाम क्रय केंद्रों में दिन भर ताला भी लगा रहता है। इलाहाबाद में इस बार 32 हजार 500 मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है लेकिन बारिश और ओलावृष्टि की वजह से फसल इस कदर बर्बाद हो चुकी है कि इस बाद लक्ष्य तक पहुंच पाना अफसरों के लिए मुश्किल होगा। कम पैदावार के साथ गेहूं खरीद के सख्त नियम भी किसानों के लिए मुसीबत का सबब बन सकते हैं। सोमवार को इलाहाबाद आई एफसीआई की केंद्रीय टीम ने जिले के हंडिया, बहादुरपुर और सहसों क्षेत्र से गेहूं के नमूने लिए। बाकी के सात नमूने प्रतापगढ़, कौशाम्बी और फतेहपुर की खागा मंडी से लिए जाएंगे।
खाद्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक स्थानीय अफसरों से चर्चा के दौरान एफसीआई टीम के सदस्यों ने गेहूं की गुणवत्ता पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार गुणवत्ता में दस फीसदी यानी एक किलो में 100 ग्राम तक की छूट की मांग कर रही है। उम्मीद है कि केंद्र सरकार इस मांग को मान लेगी लेकिन इलाहाबाद में गेहूं की जो हालत है, उससे नहीं लगता कि 10 फीसदी की छूट से भी किसानों को राहत मिलेगी। नमूने लेने के बाद प्राथमिक जांच के दौरान यही बात सामने आई है कि यहां गेहूं की गुणवत्ता में 20 से 30 तक खराब है। यानी प्रति किलो 200 से 300 ग्राम गेहूं काफी अधिक सिकुड़ा हुआ और काले रंग का है, जो गुणवत्ता के मानकों को पूरा नहीं करता है। इस बारे में डिप्टी आरएमओ एके सिंह ने बताया कि एफसीआई की टीम ने गुणवत्ता पर चिंता तो जताई है लेकिन जब तक रिपोर्ट फाइनल नहीं हो जाती है, तब तक इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। फिलहाल जिले में सभी क्रय केंद्र खोल दिए गए हैं और उनका संचालन भी शुरू हो गया है।