केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से जुड़े स्कूलों के बच्चों को जल्द ही सतत एवं समग्र मूल्यांकन पद्घति (सीसीई) से छुटकारा मिलेगा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सीबीएसई से जुड़े स्कूलों में दसवीं की बोर्ड परीक्षा कराने की घोषणा पहले ही कर दी है। अब मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री महेंद्र नाथ पांडेय ने बताया कि बच्चों को सीसीई के झंझट से बचाने के लिए मंत्रालय इसकी समीक्षा कर रहा है। इस बारे में चर्चा हो चुकी है। उम्मीद है की 2018 की बोर्ड परीक्षा में छात्रों को सीसीई से मुक्ति मिल जाएगी।
मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री महेंद्र नाथ पांडेय रविवार को इलाहाबाद प्रवास के दौरान अमर उजाला को बताया कि स्टेट बोर्ड की दसवीं या स्कूली परीक्षा पर राज्यों से स्वयं निर्णय लेने को कहा गया है। सीसीई से होने वाली परेशानियों पर राज्यमंत्री ने कहा कि सरकार देशभर से मिल रहे फीडबैक को ध्यान में रखकर जल्द ही सीसीई में सुधार करेगी। इसके संशोधित वर्जन से छात्रों एवं अभिभावकों को सहूलियत होगी।
उन्होंने कहा कि सीबीएसई की ओर से 2018 में होने वाली दसवीं की परीक्षा बोर्ड आधारित होगी। बोर्ड का विकल्प लागू होने के बाद भी दसवीं के बच्चे को सीसीई से 70 फीसदी अंक स्कूल से मिल जाते हैं। ऐसे में 30 फीसदी अंक के लिए बोर्ड परीक्षा का क्या मतलब रह जाता है। सीसीई के तहत प्रोजेक्ट एवं एक्टिविटी में बच्चा इंटरनेट के जरिए जानकारी जुटाकर स्कूल में नंबर हासिल कर लेते हैं। सीसीई से जुड़े होमवर्क माता-पिता की मदद से बच्चे पूरा करते हैं। इसमें अभिभावकों को अलग से पैसे खर्च करने पड़ते हैं। इस पर मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री ने कहा कि 2018 की बोर्ड परीक्षा से बदली व्यवस्था लागू होगी। इसमें सीसीई की खामियों को ठीक किया जाएगा।