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सरकार की संस्तुति पर ही सीबीआई करेगी आरओ-एआरओ क ी जांच

Mon, 05 Feb 2018 02:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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सीबीअाई रेड
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आरओ-एआरओ प्रारंभिक परीक्षा-2016 में पेपर आउट होने की जांच सीबीसीआईडी के पास है। प्रतियोगी मांग कर रहे थे कि सीबीआई इस मामले की भी जांच करे लेकिन सीबीआई इसके लिए तैयार नजर नहीं आ रही। दरअसल, इसके लिए राज्य सरकार सीबीआई को संस्तुति देगी और इसके बाद ही सीबीआई ये मामले अपने हाथ में ले सकेगी।
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आरओ-एआरओ प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन 27 नवंबर 2016 को किया गया था। इसमें दो लाख 32 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे। 361 पदों के लिए परीक्षा दो पालियों में हुई थी। पहली पाली में सामान्य अध्ययन और दूसरी पाली में हिंदी का पेपर आया था। पहला पेपर व्हाट्सएप पर वायरल हो गया था। बाद में दूसरे पेपर के आउट होने के साक्ष्य भी सामने आए थे। आयोग ने अपने स्तर से इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की थी। न्यायालय के आदेश पर लखनऊ में मुकदमा दर्ज किया था। पहले इसकी जांच एसटीएफ को मिली और प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा सरकार ने यह जांच सीबीसीआईडी के हवाले कर दी। हालांकि सीबीसीआई भी अब तक जांच रिपोर्ट नहीं दे सकी है। परिणाम रुका हुआ है और लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लगा है।

प्रतियोगी चाहते हैं कि इस मामले की जांच भी सीबीआई करे। रविवार को प्रतियोगियों का एक प्रतिनिधिमंडल भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष कौशल सिंह के नेतृत्व में सीबीआई के एसपी राजीव रंजन से मिलने पहुंचा। कैंप कार्यालय में प्रतियोगियों से हुई बातचीत के दौरान एसपी ने स्पष्ट किया कि यह जांच पहले से ही सीबीसीआईडी को सौंपी जा चुकी है। इस मामले में सीबीआई तब तक जांच नहीं कर सकती है, जब तक राज्य सरकार जांच टीम को इसकी संस्तुति नहीं देती। इस दौरान मोर्चा की ओर से सीबीआई को कई साक्ष्य भी उपलब्ध कराए गए।
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इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के दो पूर्व सचिव भी सीबीआई के निशाने पर हैं। इन दोनों की तैनाती पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव के कार्यकाल में शासन स्तर से की गई थी। इनमें से एक सचिव अनिल कुमार यादव और दूसरे सचिव रिजवानुर्रहमान का नाम सामने आ रहा है। रविवार को प्रतियोगी छात्रों ने भी इस मामले में सीबीआई के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराई। प्रतियोगियों ने बताया कि सचिव आईएएस का पद है लेकिन अनिल कुमार यादव पीसीएस अधिकारी थे। इसके बाद आयोग में ही तैनात कर्मचारी रिजवानुर्रहमान को सचिव के पद पर बैठा दिया गया।

तमाम विरोधों के बावजूद शासन स्तर से रिजवानुर्रहमान को नहीं हटाया गया तो प्रतियोगियों को कोर्ट में याचिका दाखिल करनी पड़ी थी और कोर्ट के आदेश पर रिजवानुर्रहमान को पद से हटाया गया था। प्रतियोगी सवाल उठा रहे हैं कि तत्कालीन सरकार के सामने ऐसी कौन सी मजबूरी थी कि प्रदेश की सबसे बड़ी भर्ती संस्था के सर्वाधिक महत्वपूर्ण पद के लिए उसे अफसर नहीं मिल रहे थे। प्रतियोगियों ने यह शिकायत भी दर्ज कराई कि मुख्यालय आयोग ने मूल्यांकन प्रक्रिया एवं संरक्षा प्रक्रिया अधिनियम-2001 का उल्लंघन करते हुए गोपनीयता की आड़ में यह भी सार्वजनिक नहीं किया मुख्य परीक्षा के लिए नियुक्त परीक्षक की योग्यता एवं अनुभव क्या है। परीक्षकों की मनमानी नियुक्ति कर मूल्यांकन में जमकर गड़बड़ी की गई।

गोविंदपुर स्थित सिंचाई डाक बंगला में सीबीआई का कैम्प कार्यालय खुलने के बाद वहां भर्ती परीक्षाओं से संबंधित एक हजार से अधिक शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं। रविवार को कुछ विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर भी वहां पहुंचे। सूत्रों का कहना है कि इन प्रोफेसरों को आयोग में विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित किया जाता रहा है। कुछ प्रोफेसरों ने सीबीआई को बताया कि है कि इंटरव्यू में कम या अधिक नंबर देने के लिए किस तरह उन पर दबाव बनाया जाता था। गोविंदपुर स्थित सीबीआई कैम्प कार्यालय में सुबह पांच से रात 12 बजे तक प्रतियोगियों एवं अन्य लोगों से साक्ष्य लिए जा रहे हैं। कई शिकायतें तो बंद लिफाफे में भेजी गई हैं और उन पर लिखा है कि इसे केवल एसपी सीबीआई ही खोलें।

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में सीबीआई जांच शुरू होने के बाद कमकाज प्रभावित न हो, इसके लिए आयोग के अफसरों ने दस रिटायर कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति के लिए प्रस्ताव फिर से शासन को भेज दिया है। साथ ही एनआईसी से भी कंप्यूटर एक्सपर्ट्स मांगे हैं। इसके लिए आयोग की ओर से काफी पहले ही एनआईसी में निर्धारित शुल्क जमा किया जा चुका है। आयोग ने काफी पहले ही शासन को प्रस्ताव भेजकर दस कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति की मांग की थी। इन कर्मचारियों को कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी जानी है, बल्कि सामान्य काम लिए जाने हैं। आयोग ने यह प्रस्ताव इसलिए भेजा था ताकि काम को बोझ कुछ कम हो और परीक्षाओं का आयोजन समय से कराया जा सके। आयोग में सीबीआई जांच शुरू होने के बाद तमाम कर्मचारियों को सीबीआई का सहयोग करने में लगा दिया गया है। ऐसे में सचिव जगदीश ने शासन को प्रस्ताव भेजकर कर्मचारियों को अविलंब पुनर्नियुक्त किए जाने की मांग की है। इसके साथ ही कंप्यूटर सेक्शन में भी एनआईसी के एक्सपर्ट्स की तैनाती की जानी है। सचिव ने एनआईसी को पत्र जारी कर एक्सपर्ट्स भेजने के लिए कहा है। आयोग के लिए निर्धारित शुल्क पहले ही एनआईसी में जमा कर चुका है।
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