रेलवे भर्ती सेल ग्रुप डी की भर्ती परीक्षा-2012 की जांच में सीबीआई के सामने मुश्किलें खड़ी होनी शुरू हो गई हैं। पहले चरण की जांच के दौरान ही कई कक्ष निरीक्षक गड़बड़ियों की जानकारी होने से मुकर गए हैं। कक्ष निरीक्षकों ने दावा किया कि ओएमआर शीट पर दस्तखत उनके हैं लेकिन उनकी मौजूदगी में कोई गड़बड़ी नहीं हुई। उन्होंने उत्तर पुस्तिकाओं के बंडल विद्यालय में जमा कर दिए। कई केंद्र व्यवस्थापकों ने भी गोलमोल जवाब दिए हैं। सीबीआई अफसर शुक्रवार को लौट गए। आशंका है कि सीबीआई के जांच अफसर जल्द ही फिर लौट सकते हैं। उधर, सीबीआई की जांच होने से केंद्र व्यवस्थापकों में खलबली मची हुई है। सभी को डर है कि केंद्रीय जांच एजेंसी उनकी गर्दन भी फंसा सकती है।
भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली हुई थी, यह बात विजिलेंस की जांच में भी साबित हो चुका है। विजिलेंस जांच के दौरान ही करीब 50 परीक्षार्थियों की ज्वाइनिंग भी रोकी गई थी। इनके मूल ओएमआर और डुप्लीकेट ओएमआर के अंकों में काफी अंतर पाए गए हैं। सीबीआई के जांच अफसर इन्हीं मूल ओएमआर के आधार पर केंद्र व्यवस्थापकों और कक्ष निरीक्षकों को तलब किया है। सूत्र बताते हैं कि तीन दिनों में दर्जनभर से ज्यादा कक्ष निरीक्षक ऐसे प्रस्तुत हुए जिन्होंने यह तो स्वीकार किया ओएमआर पर दस्तखत उनके हैं लेकिन यह नहीं माना कि परीक्षार्थी ने परीक्षा के दौरान गड़बड़ी की। हालांकि, परीक्षा केंद्रों पर परीक्षार्थियों के पास पर्चियां पकड़ी गई थीं।
परीक्षा के दौरान बड़ी संख्या ऐसे कक्ष निरीक्षकों की रहती है जो कॉलेजों के शिक्षक नहीं होते। सूत्र बताते हैं कि इसमें कई कक्ष निरीक्षकों की तैनाती में स्कूल प्रबंधकों और नकल माफियाओं की तगड़ी सेटिंग होती है। यह कक्ष निरीक्षक परीक्षार्थियों के लिए नकल सामग्री मुहैया कराते हैं। सीबीआई के अफसर ऐसे कक्ष निरीक्षकों को निशाने पर ले सकते हैं। परीक्षाओं के दौरान रेल कर्मचारियों की भी कक्ष निरीक्षक के रूप में ड्यूटी लगाई जाती है। कई केंद्रों पर एक शिक्षक और एक रेल कर्मी को कक्ष निरीक्षक बनाया जाता है। ऐसे में रेल कर्मियों को भी जांच के लिए बुलाया जाना तय है। साथ ही परीक्षा के दौरान आरआरसी में तैनात रहे अफसरों और कर्मचारियों से भी पूछताछ होनी है।