सामाजिक बंधनों को दरकिनार कर आध्यात्म की कठिन राह चुनने वाली महिला संत माघ मेले में साधना के साथ महिला सशक्तिकरण का मंत्र दे रहीं हैं। उनके शिविर में आयोजित होने वाले यज्ञ अनुष्ठान में शामिल हो रही महिलाओं को आर्थिक संबल के साथ ही कानूनी सलाह भी मुहैया कराई जा रही है। प्रवचन के दौरान अविरल निर्मल गंगाजल पाने के लिए अलख भी जगाई जा रही है।
बीते माघ मेले में महिला अखाड़ा परी का गठन करने वाले त्रिकाल भवंता के शिविर में योग, ध्यान साधना के अलावा महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्म निर्भर होने के लिए शिक्षा के महत्व को बताया जा रहा है। गांव-गांव जाकर उनकी साध्वियां बेटियों को पढ़ाने के लिए मुहिम चला रहीं हैं। त्रिकाल भवंता के अनुसार उनके शिविर में मकर संक्रांति स्नान पर्व से आत्मरक्षा की ट्रेनिंग दी जाएगी।
माघ मेला क्षेत्र के सरस्वती मार्ग पर स्थित श्रीराधा आध्यात्मिक सत्संग समिति की मुखिया साध्वी राधाचार्या साधना के साथ महिलाओं को सम्मान से जीने वह संविधान से प्राप्त हक के बारे में जानकारी दे रहीं हैं। बचपन से साधना के क्षेत्र में आने वाली राधाचार्या शिक्षा को जीने का संबल मानती हैं। बताया कि साधना के साथ ही उन्होंने कानून की इसलिए पढ़ाई की है कि वे महिलाओं को उनके हक के बारे में बता सके। कहा शिक्षित हुए बगैर सम्मान पाने की लालसा बेमानी है।
त्रिवेणी मार्ग स्थित प्रेममिशन शिविर में मां कल्याणी बेटियों को सबला होने के साथ पारिवारिक संबंधों के ताने-बाने को बनाए रखने की सीख दे रहीं हैं। उन्होंने कहा कि बेटियां सशक्त होंगी तभी समाज व देश का सर्वांगीण विकास होगा।
साध्वी शालिनी श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से महिलाओं को सशक्तिकरण की सीख दे रहीं हैं।