प्रदेश भर में नदियों से बालू के अवैध खनन की जांच सीबीआई को सौंपने के हाईकोर्ट के आदेश को वापस लेने के लिए सरकार ने अर्जी दाखिल की है। रिकॉल अर्जी में सीबीआई जांच का आदेश स्थगित करने की मांग की गई है। हालांकि, कोर्ट ने जांच का आदेश बरकरार रखा है और याचिका दाखिल करने वालों से इस मामले में जवाब मांगा है। अर्जी पर 17 अगस्त को सुनवाई होगी।
प्रदेश सरकार की अर्जी पर मुख्य न्यायाधीश दिलीप बी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने कहा कि याचिकाएं राजनीतिक विद्वेष के कारण दाखिल की गईं हैं। इस याचिका में सीबीआई जांच की मांग भी नहीं की गई थी। कुछ लोग अपने खनन पट्टों का नवीनीकरण नहीं होने के कारण मामला हाईकोर्ट ले आए। राज्य सरकार स्वयं अवैध खनन के खिलाफ निगरानी कर रही है। कोर्ट का कहना था कि अवैध खनन उत्तर प्रदेश ही नहीं अन्य राज्यों में भी हो रहा है, यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। कोर्ट ने सीबीआई को कार्रवाई का अधिकार नहीं दिया है। उससे रिपोर्ट मांगी है। सीबीआई की रिपोर्ट पर निर्भर करेगा कि क्या कार्रवाई की जाए। यदि जांच में अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट आती है तो इससे सरकार को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। याची के अधिवक्ता का कहना था कि पूरे प्रदेश में एक सिंडिकेट काम कर रहा है, जिसकी जांच होना आवश्यक है।