इलाहाबाद। अवैध खनन में अधिकारियों और खनन माफियाओं की मिली भगत और भूमिका की जांच कर रही सीबीआई को हाईकोर्ट ने खुली छूट दी है। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई किन्हीं पांच जिलों को केंद्रित कर अवैध खनन की जांच करे मगर जांच का दायरा पूरा प्रदेश होगा। इसमें जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाए।
प्रदेश भर के 23 जिलों से अवैध खनन को लेकर याचिकाएं हाईकोर्ट में दाखिल की गई हैं। इस पर कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी है। शुक्रवार को सीबीआई के अधिवक्ता ने अर्जी देकर जांच का दायरा सीमित करने की मांग की है। कोर्ट ने इस पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति दिलीप बी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने इससे पूर्व सीबीआई द्वारा मात्र एक जिले में जांच करने पर नाराजगी जताई थी।
सीबीआई ने अवैध खनन की मात्र जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इस पर आगे क्या करना है इस संबंध में कुछ नहीं कहा था। पीठ ने इस रवैये पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि जरूरत थी तो सीबीआई कोर्ट में अर्जी दाखिल कर आगे के लिए निर्देश मांग सकती थी। इसके बाद सीबीआई की ओर से अर्जी दाखिल कर कहा गया कि पूरे प्रदेश में जांच करने में कठिनाई आ रही है, इसलिए जांच का दायरा सीमित किया जाए। इस पर कोर्ट ने सीबीआई को किन्हीं पांच जिलों को फोकस कर जांच करने का निर्देश दिया है। जांच में जो भी दोषी पाया जाता है उसके खिलाफ नियमानुसार मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
उल्लेखनीय है कि अवैध बालू खनन की शिकायत को लेकर हाईकोर्ट में 23 जिलों से दर्जनों याचिकाएं दाखिल की गई हैं। प्रदेश सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि सरकार खुद अवैध खनन को लेकर सख्त है और कार्रवाई हो रही है। कहीं भी अवैध खनन होने की बात से भी प्रदेश सरकार ने इंकार किया था। मगर अवैध खनन को लेकर जो साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए गए उसे देखते हुए कोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंप दी थी।