इलाहाबाद। हाईकोर्ट में गलत हलफनामा दाखिल करने के मामले में उच्च शिक्षा निदेशक और वित्त नियंत्रक फंस गए हैं। हाईकोर्ट ने दोनों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। पूछा है कि अदालत को गुमराह करने पर क्यों न इन अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए। दोनों अफसरों को सीजेएम इलाहाबाद के जरिए नोटिस भेजा गया है।
महात्मा गांधी पीजी कालेज फतेहपुर की याचिका पर न्यायमूर्ति सुनीत कुमार सुनवाई कर रहे हैं। याचिका में कहा गया है कि कालेज के पूर्व प्रधानाध्यापक अवधेश कुमार सिंह पर गबन का आरोप है। इसकी वजह से उनके जीपीएफ का भुगतान रोक दिया गया। इसे आधार बनाते हुए उच्च शिक्षा निदेशक और वित्त नियंत्रक ने कालेज स्टॉफ और अध्यापकों का वेतन रोक दिया था। कहा गया कि जब तक पूर्व प्रधानाध्यापक का जीपीएफ नहीं दिया जाएगा किसी भी स्टॉफ को वेतन का भुगतान नहीं जाएगा।
इस अदालत ने जब दोनों अधिकारियों से जवाब मांगा तो पहले उन्होंने बताया कि निदेशक को भुगतान रोकने का अधिकार है। वेतन रोकने में कोई गलती नहीं की गई क्योंकि कालेज प्रबंध समिति पूर्व प्रधानाचार्य के जीपीएफ का भुगतान नहीं कर रही है। इसके बाद दोबारा अधिकारियों की ओर से जवाब दाखिल किया गया कि कालेज का वेतन नहीं रोका गया है। 20 सितंबर 2016 को वेतन जारी कर दिया गया। मगर अधिकारियों ने सात माह तक वेतन रोके रखने का कोई कारण नहीं बताया। यह भी पता चला कि 20 सितंबर को वेतन भुगतान का जो आदेश जारी किया गया वह ट्रेजरी में भेजा ही नहीं गया। आदेश जारी कर अधिकारियों ने उसे अपने पास ही रख लिया।
अफसरों की करतूत पर गहरी नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने कहा कि दोनों अधिकारियों ने अपने खिलाफ कार्रवाई को खुद ही आमंत्रित किया है। इनके खिलाफ सिविल और आपराधिक कार्रवाई का मामला बनता है। याचिका पर अगली सुनवाई तीन नवंबर को होगी।