एक जून को तत्कालीन अधीक्षण अभियंता एके द्विवेदी ने कुंभ मेला डिवीजन के एक्सईएन को पत्र लिखकर चेताया था कि तत्काल पांटून पुलों को खुलवा दिया जाए। ऐसा न हुआ तो इसके लिए आप खुद उत्तरदायी होंगे। इसके बाद भी पांटून पुलों को नहीं खोला जा सका। अंतत: इसमें से 12 पीपे बह गए हैं। बेली कछार में विस चुनाव के दौरान जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा हुई थी, वहां से करीब तीन सौ से अधिक चकर्ड प्लेट भी नहीं उठाई जा सकी है। जबकि, गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से ये चकर्ड प्लेटें किसी भी समय गंगा में डूब सकती है।
उल्लेखनीय है कि फाफामऊ में अप और डाउन दो पांटून पुल बनाए गए थे। अप पांटून पुल के कुंभ मेला स्टोर से 51 और डाउन पांटून पुल के लिए 89 पीपे की निकासी हुई थी। इसमें से 13 पीपे अभी तक स्टोर में जमा नहीं कराए जा सके हैं। शुक्रवार को सात पीपे बहकर दारागंज से आगे पहुंच गए । चार पीपे अभी पुल के पास ही पड़े हैं। जबकि दो पीपे इस पुल निर्माण के दौरान बनाई गई अस्थाई पुलिया में लगे हुए हैं। इस पुल के सहायक अभियंता धनीराम ने स्वीकार किया कि कुछ चकर्ड प्लेटें अभी उठाई नहीं जा सकी हैं। जो पीपे अभी स्टोर में नहीं पहुंचे हैं, उन्हें शीघ्र जमा करा दिया जाएगा।
फाफमऊ पांटून पुल में लगे पीपों के बहने के मामले की जांच कराई जाएगी। इसके लिए जिम्मेदार जेई और एई से जबाव तलब किया जाएगा। - रामाशंकर यादव, अधीक्षण अभियंता, प्रयागराज।