हाईकोर्ट में एक केस के शीघ्र निस्तारण की मांग में दाखिल याचिका पर बड़ा खुलासा हुआ है। न्यायालय ने पाया कि प्रयागराज में वकीलों का एक गैंग है, जो महिलाओं को गैंग में शामिल कर निर्दोष लोगों पर एससीएसटी एक्ट के झूठे आपराधिक केस दर्ज करा रहा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि बार और बेंच न्याय की दो आंखें हैं। न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग की छूट किसी को नहीं दी जा सकती। न्यायालय ने कहा कि झूठे केस में फंसाकर सरकारी धन के बंदरबांट की अनदेखी नहीं की जा सकती। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
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हाईकोर्ट में एक केस के शीघ्र निस्तारण की मांग में दाखिल याचिका पर बड़ा खुलासा हुआ है। न्यायालय ने पाया कि प्रयागराज में वकीलों का एक गैंग है, जो महिलाओं को गैंग में शामिल कर निर्दोष लोगों पर एससीएसटी एक्ट के झूठे आपराधिक केस दर्ज करा रहा है। चार्जशीट दाखिल होने पर सरकार से पीड़िता को मिली राशि का बंटवारा किया जाता है।
तमाम लोगों सहित वकीलों को भी झूठे केस में फंसाया गया है। भूपेंद्र पांडेय को दुष्कर्म के झूठे केस में फंसाया गया। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए न्यायमूर्ति डाॅ. गौतम चौधरी ने न्याय हित में सीबीआई को प्रारंभिक जांच सौंपी थी, जिसने गैंग को कटघरे में ला खड़ा किया है। कुछ की एसआईटी से भी जांच कराई गई।
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न्यायालय ने अधिवक्ता भूपेंद्र पांडेय के खिलाफ निक्की देवी की ओर से दारागंज थाने में दर्ज मामले में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने के बाद याचिका अर्थहीन करार दी। दूसरी तरफ सीबीआई ने विशेष अदालत लखनऊ में याची निक्की देवी, अधिवक्ता विनोद शंकर त्रिपाठी व सुधाकर मिश्र के खिलाफ धारा 120बी व धारा 211 भारतीय दंड संहिता के तहत केस चलाने की अर्जी दी।
वहीं, कोर्ट ने एसआईटी को आठ मामलों की विवेचना करने का आदेश दिया। आदेश की प्रति आईजी एसआईटी लखनऊ को भेजने को कहा है।कोर्ट ने 108 पृष्ठ के फैसले में पूरा खुलासा करते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करने वाले बचने नहीं चाहिए। फिलहाल एसआईटी आठ केसों की विवेचना करेगी। जिनमें चार्जशीट दाखिल हो चुकी है संबंधित जिला जजों से ट्रायल पूरा कराने को कहा गया है। याचिका पर अधिवक्ता शैलेश मिश्र, सीबीआई के वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश व संजय यादव व विपक्षी भूपेंद्र पांडेय ने बहस की।