इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झूठे केस में फंसाने के मामले की जांच कर रही सीबीआई को 23 आपराधिक केसों की प्रारंभिक जांच करने का निर्देश दिया है। यह भी माना कि एक गैंग झूठे केस में फंसाने के काम में लगा हुआ है। अधिवक्ता अमित डागा ने अर्जी देकर सरितेंद कुमार जायसवाल उर्फ आशीष, नंद कुमार जायसवाल, अभिषेक कुमार जायसवाल, नितिन केसरवानी को पक्षकार बनाने सहित सराय इनायत थाने में दर्ज झूठे केस की सीबीआई जांच कराने की मांग की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
सीबीआई ने जांच रिपोर्ट पेश की। न्यायमूर्ति गौतम चौधरी ने रिपोर्ट देखने के बाद सीलबंद कर महानिबंधक को सुरक्षित अभिरक्षा में रखने का निर्देश दिया। रिपोर्ट में बताया गया है कि 47 केस में से 7 केस मऊआइमा के दोहराए गए है। एक शिवकुटी का अस्तित्व ही नहीं है। 38 केसों की जांच की गई। 25 केस में कुछ नहीं मिला।12केस सही नहीं पाए गए। एक केस में पुलिस रिपोर्ट का इंतजार है।
कोर्ट ने जांच रिपोर्ट पर संतोष जताया। कहा, पूरी तरह से जांच की जरूरत है। सरकार को रिकॉर्ड सीबीआई को सौंपने तथा जांच में सहयोग करने का निर्देश देने सहित अभियुक्तों व पीड़ितों की जांच रिपोर्ट आने तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। निक्की देवी की याचिका की अगली सुनवाई 6 फरवरी को होगी।