डाकघर में निखिल की चलती थी मनमानी
दारागंज डाकघर में निखिल की मनमानी चलती थी। वह डाकघर में विभागीय कर्मचारियों की तरह बैठता था और कागजात व मुहर आदि का प्रयोग करता था। अफसरों के बीच उसकी पैठ इतनी थी कि वह कर्मचारियों का तबादला करवा देता था। उसके लेनदेन में जिसने पूछताछ की, उसका तबादला निश्चित था। 2018 में निखिल में खाते में हेराफेरी की। तत्कालीन कर्मचारी मान सिंह ने उसकी गड़बड़ी पकड़ी। उसने इसकी जानकारी पोस्ट मास्टर को दी।
गड़बड़ी पकड़ना मान सिंह के लिए उल्टा पड़ गया। उसे वहां से शंकरगढ़ डाकघर भेज दिया गया। ऐसे ही पिछले वर्ष कर्मचारी आशीष द्विवेदी ने निखिल की गड़बड़ी पकड़ी थी। उसका तबादला दांदूपुर डाकघर करवा दिया था। वह किसी तरह लौटकर दारागंज आए तो उनको सस्पेंड करवा दिया। उसकी दबंगई इतनी कि लेनदेन में कोई आपत्ति नहीं करता था। पोस्टमास्टर और अफसरों में पैठ होने के कारण वह नियमित डाकघर में बैठता था। खातेदारों के बिना आए ही वह उनके खाते से पैसे निकाल लेता था।
छपवाई नकली पासबुक
डाकघर से कुछ खाली पासबुक निखिल उठा ले गया और उसमें फर्जी अकाउंट नंबर डालकर दे दिया। पासबुक में प्रिंटिंग सिदि्ध साइबर कैफे से करवाता था। उसने कई पासबुक साइबर कैफे से बनवाई और ग्राहकों को दे दिया। बाहर से बनवाई गई पासबुक और डाकघर की पासबुक में मामूली अंतर होता है। डाक विभाग के कर्मचारी देखे तो पकड़ लिए। डाकघर में पासबुक की इंट्री के अक्षर उभरे रहते हैं, जिससे कि दिव्यांग भी उसे छूकर जान सके। निखिल ने कंप्यूटर से पासबुक पर इंट्री करवाकर लोगों को दे दिया था।
तीन वर्ष में जमा कराए थे 80 करोड़
नीति श्रीवास्तव की एजेंसी दिसंबर 2018 में खुली थी। तीन वर्ष बाद दिसंबर 2021 में वह रीन्यू हुई। तीन वर्ष में उसने 80.10 करोड़ रुपये डाकघर में निवेश करवाए थे। उसे कमीशन के रूप में 40.05 लाख रुपये मिले थे। इतनी अच्छी एजेंसी चलने के बावजूद नीति और उसके भाई निखिल ने फर्जीवाड़ा किया।
बचत विभाग ने लेनदेन पर लगाई रोक
एजेंट डाकखाने में काम करते हैं,लेकिन उनको बचत विभाग से एजेंसी दी जाती है। निधि की एजेंसी में वंदना कुशवाहा और नवल सिंह गारंटर हैं। निधि श्रीवास्तव के खिलाफ बचत विभाग को छह मई को शिकायत मिली। बचत विभाग के सहायक निदेशक रविंद्र प्रताप यादव ने बताया कि शिकायत मिलते ही निधि श्रीवास्तव को नोटिस जारी किया गया। उसने अपना पक्ष रखा, लेकिन विभाग उससे सहमत नहीं है। इसलिए दारागंज पोस्टमास्टर को आठ मई को पत्र भेजकर एजेंट के लेनदेन पर रोक लगा दी गई। इस मामले में अब तक 15 शिकायतें आ चुकी है। एजेंट के खिलाफ डाक विभाग को मुकदमा दर्ज कराना चाहिए।