बुधवार को मिले थे रुपये से भरे तीन ड्रम
बुधवार देर शाम को गांव के राकेश यादव के मकान में नकदी से भरे प्लास्टिक के तीन ड्रम गड़े मिले थे। इनमें 500-500 रुपये के नोटों की गड्डियां थीं। पुलिस के मुताबिक, राकेश का भाई बबलू यादव पिछले कई वर्ष से पुणे में रहता था। राकेश अपने भाई के पास आता जाता था। पुणे में वह किसी कंपनी में काम करता था। वर्ष 2020 में कोरोना काल के दौरान लॉकडाउन में राकेश यादव गांव आया था। उसके साथ दो जीजा और साढ़ू भी आए थे। चर्चा है कि रुपये वहीं से लाए गए थे। वहीं, पुलिस को दिए बयान में राकेश यादव ने बरामद नकदी उसकी होने की बात से इन्कार किया है। फिलहाल इस मसले पर पुलिस की ओर से आधिकारिक सूचना नहीं जारी की जा रही है।
जाने क्या है ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार
ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार जमीन के अंदर छिपी वस्तुओं का पता लगाने वाली आधुनिक तकनीक है। यह जमीन में रेडियो तरंगें भेजता है। जमीन के नीचे मौजूद धातु, खाली जगह, पाइप या अन्य वस्तुओं से टकराकर ये तरंगें वापस लौटती हैं। इनके संकेतों का विश्लेषण कर जमीन के भीतर मौजूद वस्तुओं की स्थिति, गहराई और आकार का अनुमान लगाया जाता है। इस तकनीक में बिना बड़े पैमाने पर खोदाई किए जमीन के अंदर की स्थिति का पता लगाया जा सकता है।
खोजी कुत्ते से भी कराई गई मकान की तलाशी
करोड़ों रुपये की नकदी मिलने के बाद जांच एजेंसियां हर पहलू की पड़ताल कर रही हैं। मकान और उसके आसपास के हिस्सों में खोजी कुत्ते की मदद से भी तलाशी कराई गई। टीमें यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी रकम कहां से आई और इसे प्रयागराज तक कैसे पहुंचाया गया। इसके लिए संबंधित लोगों के संपर्कों, उनकी गतिविधियों और बैंक खातों में हुए लेनदेन की जानकारी जुटाई जा रही है। डीसीपी गंगापार सोनम कुमार ने बताया इस रकम को लाने और छिपाने में किन लोगों की भूमिका रही है, जांच की जा रही है।