सूबे के मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी पर कातिलाना हमले की एफआईआर पर बचाव पक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। पूछा, बम फटने से मची अफरा-तफरी के बीच इतनी जल्दी एफआईआर कैसे दर्ज हो गई? इसमें सुपारी किलर का नाम क्यों नहीं है।
सूबे के मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी पर कातिलाना हमले की एफआईआर पर बचाव पक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। पूछा, बम फटने से मची अफरा-तफरी के बीच इतनी जल्दी एफआईआर कैसे दर्ज हो गई? इसमें सुपारी किलर का नाम क्यों नहीं है, यह तहरीर किसने लिखी, किसने टाइप कराई, हाथ से लिखी तहरीर कहां है?
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अभियोजन पक्ष के बाद दो दिन से बचाव पक्ष जिला अदालत की एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश डॉ दिनेश चंद्र शुक्ला की कोर्ट में दलीलें रख रहा है। अभियोजन के दावों को खारिज करते हुए अधिवक्ता ने कहा कि सुपारी किलर राजेश पायलट को मंत्री की पहचान आरोपी राजेश यादव ने नहीं कराई थी। वह उस वक्त वहां था ही नहीं।
हमले में आरोपी पूर्व ब्लाक प्रमुख दिलीप मिश्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ताराचंद्र गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दे एफआईआर पर सवाल उठाए। कहा, एफआईआर पर सीओ के हस्ताक्षर बिना तारीख के हैं। यह प्रथमदृष्टया संदेहास्पद है। एफआईआर कानूनी राय लेकर लिखी गई है।
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कहा, इसमें रंजिशन दिलीप, राजेश यादव व कृपाशंकर को नामजद किया गया है, जबकि पुलिस को राजेश पायलट के इरादों की पहले ही भनक लग चुकी थी। बावजूद इसके एफआईआर में राजेश पायलट समेत कई आरोपियों के नाम नहीं जोड़े गए। इन्हें विवेचना में रंजिशन जोड़ा गया। यह भी दलील दी कि विवेचना के दौरान गवाही दर्ज करने का विवरण जनरल डायरी (जीडी) पर दर्ज नहीं है। बचाव पक्ष सोमवार को भी अभियोजन के दावों की काट पेश करेगा।