इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के चुनाव में इस बार भी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) को तगड़ा झटका लगा। एबीवीपी ने महामंत्री पद पर कब्जा बरकरार रखा लेकिन, पांच प्रमुख पदों में से चार पर समाजवादी पार्टी की छात्र इकाई समाजवादी छात्र सभा (सछास) और कांग्रेस की छात्र इकाई भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने कब्जा कर लिया। दोनों छात्र संगठनों को दो-दो पद मिले। आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा के लिए यह परिणाम बहुत उत्साहवर्धक नहीं माना जा रहा।
समाजवादी छात्रसभा के खाते में अध्यक्ष एवं संयुक्त मंत्री और एनएसयूआई के खाते में उपाध्यक्ष एवं सांस्कृतिक सचिव का पद आया। इससे पूर्व शुक्रवार सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक चले मतदान में 48.5 फीसदी वोटरों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। अध्यक्ष पद पर समाजवादी छात्रसभा के उदय प्रकाश यादव विजयी घोषित किए गए। उदय प्रकाश ने 3698 वोट पाकर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी एबीवीपी के अतेंद्र सिंह को बड़े मतों के भारी अंतर से पराजित किया।
वहीं, उपाध्यक्ष पद पर एनएसयूआई के अखिलेश यादव ने 2157 मत प्राप्त कर नितेश सिंह राजपूत को 315 मतों से हराया। महामंत्री पद पर विजयी रहे एबीवीपी के शिवम सिंह (2823 मत) ने समाजवादी छात्रसभा के राहुल यादव ‘रुद्र’ को 270 मतों से हराया। संयुक्त मंत्री के पद पर समाजवादी छात्रसभा के सत्यम सिंह ‘सनी’ ने चंदन कुमार गुप्ता ‘चंदू’ को 952 मतों के भारी अंतर से पराजित किया जबकि सांस्कृतिक सचिव पद पर निर्वाचित घोषित किए गए एनएसयूआई के आदित्य सिंह ने 1832 मत हासिल कर शिवम मौर्या को 174 वोटों के अंतर से हराया।
इसके अलावा स्नातक प्रतिनिधि (कला संकाय) पद के लिए अभिनव द्विवेदी, वाणिज्य संकाय के लिए विवेक कुमार यादव ‘विक्की’, विधि संकाय के लिए ज्ञानेश कुमार एवं विज्ञान संकाय के लिए प्रकाश शुक्ला और परास्नातक एवं शोध प्रतिनिधि (कला संकाय) पद के लिए मुकेश जायसवाल, वाणिज्य संकाय के लिए बृजेंद्र उपाध्याय, विधि संकाय के लिए अभिषेक कुमार मिश्र एवं विज्ञान संकाय के लिए राजीव रंजन निर्वाचित घोषित किए गए। पिछले छात्रसंघ चुनाव में महामंत्री को छोड़ बाकी चारों प्रमुख पदों पर समाजवादी छात्रसभा ने कब्जा किया था।
एनएसयूआई ने उतारे दो प्रत्याशी, दोनों जीते
- इस बार एनएसयूआई ने केवल दो पदों उपाध्यक्ष और सांस्कृतिक सचिव पद पर प्रत्याशी उतारे थे और दोनों ही पदों पर एनएसयूआई ने कब्जा कर लिया जबकि पिछली बार एनएसयूआई को तगड़ा झटका लगा था और किसी भी पर उसे जीत नहीं मिली थी।
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