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प्राथमिकी दर्ज होने के आधार पर नहीं किया जा सकता निलंबित

Wed, 02 Dec 2020 09:00 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय - फोटो : file photo
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिर्फ प्राथमिकी दर्ज होने के आधार पर कर्मचारी का निलंबन करने को सही आधार नहीं माना है। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी को दी गई चार्जशीट में भी वही आधार लिया गया है जो प्राथमिकी में है। इसका अर्थ है कि निलंबन आदेश जारी करने वाले अधिकारी ने अपने विवेक का प्रयोग नहीं किया है। कोर्ट ने निलंबन आदेश रद़द करते हुए याची को चार्जशीट पर अपना उत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया है। खाद्य नियंत्रक कार्यालय मिर्जापुर में कार्यरत तृतीय श्रेणी कर्मचारी राजकुमार तिवारी की याचिका पर न्यायमूर्ति नीरज तिवारी ने सुनवाई की। 

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याची का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और विभू राय का कहना था कि विंध्याचल मंडल में क्षेत्रीय खाद्य नियंत्रक कार्यालय में तृतीय श्रेणी कर्मचारी है। राज्य सरकार की नीति के तहत ट्रांसपोर्ट कांट्रैक्टर की नियुक्ति की जानी थी। जिसके एक कमेटी गठित की गई। कुल चार कंपनियों ने टेंडर डाले। जिसमें से मेसर्स लैपटाप केयर को ठेका आवंटित किया गया। बाद में कुछ शिकायतों के आधार पर उसका ठेका रद्द कर दिया गया। प्रतिस्पर्धी कंपनी विनीत इंटर प्राइजेज ने ठेका न मिलने पर मेसर्स लैप टाप और याची सहित कई लोगों के खिलाफ गोपीगंज थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया। इस प्राथमिकी के आधार पर याची को निलंबित कर दिया गया।


वरिष्ठ अधिवक्ता का कहना था कि कोर्ट द्वारा इस मामले में जवाब मांगने के बाद याची को आनन-फानन में विभाग ने अपना बचाव करने के इरादे से चार्जशीट पकड़ा दी। चार्जशीट में याची के खिलाफ कोई तथ्य नहीं है। कोर्ट ने दस्तावेजों को देखने के बाद कहा कि चार्जशीट प्राथमिकी के आधार पर तैयार की गई है। कोई अलग से जांच नहीं की गई। कोर्ट ने निलंबन आदेश रद्द कर दिया है।

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