जब संशोधित परिणाम में चयनित अभ्यर्थी भी नियुक्ति के लिए न्यायालय की शरण में गए तो कोर्ट ने आयोग और शासन से पूछा कि क्या इनके लिए सीट खाली है। स्टैंडिंग काउंसिल की ओर से कोर्ट को बताया गया कि कि कॉलेजों में पद खाली हैं। न्यायालय ने रिक्त पदों पर इन्हें समायोजित करने का आदेश दिया। नियुक्ति की प्रक्रिया उच्च शिक्षा निदेशालय पूरी करता है।
निदेशालय की ओर से कहा गया कि जितने पदों का विज्ञापन हुआ था, उतने पदों पर अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जा चुकी है। विज्ञापित पदों के अलावा बिना विज्ञापन के अन्य पदों पर नियुक्ति देने का कोई प्रावधान नहीं है। उच्च शिक्षा निदेशालय इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है और इसके लिए शासन से अभिमत मांगा गया है। इसी वजह से संशोधित परिणाम में चयनित 18 अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दी है, ताकि निदेशालय की ओर से याचिका दाखिल होने पर अभ्यर्थियों को भी अपना पक्ष रखने का मौका मिल सके।