प्रयागराज। उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए चल रहे इंटरव्यू की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अभ्यर्थी की पहचान पूरी तरह से छिपाने के लिए आयोग ने कोडिंग व्यवस्था लागू कर दी है। मंगलवार को समाजशास्त्र और हिंदी के इंटरव्यू में इस नई व्यवस्था का सफल परीक्षण किया गया। हालांकि, इंटरव्यू के बीच में अचानक नई व्यवस्था लागू किए जाने से तमाम तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं।
आयोग की सचिव वंदना त्रिपाठी की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग एवं अन्य आयोगों के समान साक्षात्कार प्रक्रिया में शुचित एवं पारदर्शिता लाने के लिए कोडिंग व्यवस्था को लागू किया गया है। इससे चयन एवं साक्षात्कार प्रक्रिया में गोपनीयत और शुचिता बढ़ेगी। अब तक इंटरव्यू के दौरान अभ्यर्थियों के रोल नंबर का जिक्र होता था, जिससे उनकी पहचान आसानी से हो सकती है। अब रोल नंबर की जगह कोड होगा और रिजल्ट तैयार करने वक्त उस कोड को डिकोड किया जा सकेगा। ऐसे में इंटरव्यू के दौरान अभ्यर्थी की पहचान की कोई गुंजाइश नहीं रही जाएगी। हालांकि यह व्यवस्था अचानक लागू किए जाने से कई सवाल भी उठ रहे हैं।
आयोग में इन दिनों विज्ञापन संख्या 47 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती का इंटरव्यू चल रहे हैं। इस विज्ञापन के तहत 35 विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 1150 पदों पर भर्ती की जानी है। आयोग की ओर से अब तक 31 विषयों की इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और उनका अंतिम चयन परिणाम भी जारी किया जा चुका है। इनमें से 26 विषयों के अभ्यर्थियों की नियुक्ति के लिए 21 से 24 दिसंबर तक ऑनलाइन काउंसलिंग भी है, जिसका कार्यक्रम उच्च शिक्षा निदेशालय जारी कर चुका है। भर्ती अंतिम दौर में है। इन दिनों आयोग में हिंदी और समाजशास्त्र विषय का इंटरव्यू चल रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि भर्ती प्रक्रिया के अंतिम दौर में अचानक कोडिंग व्यवस्था लागू करने की जरूरत क्यों पड़ी? आयोग के अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा का कहना है कि यह सामान्य प्रक्रिया है। अभ्यर्थियों की बेहतरी के लिए इसे लागू किया गया है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
नाम, गांव तक पूछे जाने पर प्रतिबंध
असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के इंटरव्यू में बोर्ड के सदस्यों पर कई तरह के सवाल पूछे जाने पर प्रतिबंध रहता है। इंटरव्यू के दौरान अभ्यर्थियों से उनका नाम, पता, गांव, मुहल्ला के बारे में नहीं पूछ सकते। यह भी नहीं पूछ सकते कि अभ्यर्थी ने किसके निर्देशन में पीएचडी की। यहां तक कि पब्लिकेशन में अभ्यर्थी का जहां नाम लिखा होता है, उस पर काली स्लिप लगाकर उसे भी गोपनीय रखा जाता है।