उसने जांच अधिकारी से इस वक्तव्य की रिकॉर्डिंग हासिल की और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में संगीता जेके के खिलाफ मानहानि दावा किया। अपने इस दावे में शिकायतकर्ता ने याची पर एक अन्य राजू कुमार कनौजिया को धमकी देने का आरोप भी लगाया था।
मजिस्ट्रेट की अदालत ने मामले का संज्ञान लेते हुए संगीता जेके के खिलाफ समन (तलबी आदेश) जारी कर दिया। जिसके खिलाफ याची ने जिला जज की अदालत में पुनरीक्षण दाखिल किया, लेकिन जिला जज की अदालत ने भी मजिस्ट्रेट के आदेश पर अपनी मुहर लगा दी। जिसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
याची की दलील
याची ने दलील दी कि उसने ऐसी टिप्पणी किसी बदनीयती से नहीं की। यह महज सामान्य बातचीत का अंश है।
कोर्ट ने कहा
कोर्ट ने याची की ओर से दाखिल याचिका को स्वीकार करते हुए दोनो निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया। कहा कि अनौपचारिक माहौल में ऐसी टिप्पणियां सहज भाव में जाने अंजाने हो सकती हैं और मुद्दा बनाने के लिए अपमान के तौर पर पेश भी किया जा सकता है, लेकिन यह तब तक आईपीसी धारा 504 के तहत किया गया अपराध नहीं माना जा सकता जब तक तथ्य और परिस्थितियों से प्रथम दृष्टया यह प्रतीत न हो कि ऐसी टिप्पणी सहज बातचीत से इतर जानबूझकर किसी को शांतिभंग करने के लिए उकसाने के लिए की गई थी। मौजूदा मामले के तथ्य और परिस्थितियों में ऐसी कोई बात परिलक्षित नहीं हो रही, जिससे यह कहा जा सके कि याची ने जानबूझकर शिकायतकर्ता को पागल कहा हो।