इलाहाबाद (ब्यूरो)। इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी बनाने की घोषणा क्या हुई, शहर में जमीन की कीमत आसमान पर पहुंच गई है। शहर के पॉश इलाकों और व्यावसायिक क्षेत्रों में जमीन की कीमत पिछले एक वर्ष में दोगुना से ज्यादा बढ़ चुकी है। नतीजा है कि अब इतनी महंगी जमीन के लिए खरीदार नहीं मिल रहे हैं। दूसरे अगर किसी ने जमीन खरीद भी ली तो इलाहाबाद विकास प्राधिकरण (एडीए) से नक्शा पास कराने में भी 30-40 लाख रुपये या उससे अधिक का खर्च आता है।
इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी बनाने की घोषणा पिछले वर्ष अक्तूबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी दौरे के दौरान हुई। इसके बाद से अब तक कई बार अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इलाहाबाद आ चुका है। केंद्रीय और राज्य स्तर पर कई बैठकें हुईं। आईबीएम के विशेषज्ञ भी पिछले माह यहां आए, लेकिन स्मार्ट सिटी के लिए होना क्या है, यह अब तक तय नहीं हो सका है। पिछले वर्ष अक्तूबर से अब तक एक वर्ष में स्मार्ट सिटी के लिए तो कुछ नहीं हुआ लेकिन इसके नाम पर खासकर पॉश इलाकों में जमीन की कीमत काफी तेजी से बढ़ गई।
पिछले वर्ष अक्तूबर से पहले तक सिविल लाइंस, अशोक नगर, जॉर्जटाउन, टैगोर टाउन, लूकरगंज जैसे पॉश इलाकों में जमीनें 50-55 हजार रुपये वर्गमीटर की दर से बिक रही थीं, लेकिन अब इन्हीं इलाकों में जमीन की कीमत एक लाख रुपये से ऊपर पहुंच गई है। इन इलाकों में 200 से 500 या फिर एक हजार वर्गमीटर के काफी प्लॉट खाली पडे़ हैं। जिनके प्लॉट हैं, उन्होंने ज्यादा कीमत वसूलने की उम्मीद लगा रखी थी, लेकिन अब खुले बाजार में कीमत दोगुना से ज्यादा होने के कारण खरीदार भी नहीं मिल रहे हैं।
शहर के पॉश बाजार सिविल लाइंस में एमजी मार्ग और उससे लगी सड़कों पर तो व्यावसायिक प्लॉट की कीमत 1.30 लाख से 1.50 लाख रुपये वर्गमीटर तक पहुंच गई है। एडीए के अफसरों की मुताबिक बिना लेआउट प्लान वाले ऐसे प्लॉटों का नक्शा स्वीकृत कराने में सर्किल रेट का 30 फीसदी सब डिवीजन चार्ज लगता है। ऐसे में नक्शा पास कराना भी काफी महंगा हो जाता है।