नियुक्ति न देने का हर बार बनाया अलग आधार
याची के अधिवक्ता कमल कुमार केशरवानी ने दलील दी कि याची का मामला 2021 का है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस मामले में लागू नहीं होगा। साथ यह भी दलील दी कि बीएसए ने हाईकोर्ट के आदेशों पर अलग-अलग आधार लेते हुए नियुक्ति देने से इन्कार किया है। पहली बार विवाहित होने व दूसरी और तीसरी बार माता पिता के सेवा में होने के आधार नियुक्ति देने से इंकार कर दिया। जबकि शपथपत्र में बीएसए ने यह आधार लिया कि वर्तमान में बीएड डिग्री धारक को सहायक अध्यापक नहीं बनाया जा सकता है। न्यायालय ने बार-बार अलग-अलग आधार पर अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन को खारिज करने पर नाराजगी जताते हुए बीएसए को 27 फरवरी 2025 को तलब कर लिया है।