इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीजीसी सिविल की विधिक राय पर अपने विवेक का इस्तेमाल किए बिना अकारण पारिवारिक पेंशन देने से इन्कार करने पर बिजनौर के बीएसए पर पांच हजार का हर्जाना लगाया है। कोर्ट ने बीएसए के विवादित आदेश को रद्द कर दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीजीसी सिविल की विधिक राय पर अपने विवेक का इस्तेमाल किए बिना अकारण पारिवारिक पेंशन देने से इन्कार करने पर बिजनौर के बीएसए पर पांच हजार का हर्जाना लगाया है। कोर्ट ने बीएसए के विवादित आदेश को रद्द कर दिया। नए सिरे से नियमानुसार एक माह में आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी ने गुलनार की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। याची के पति शफीकुर्रहमान उच्च प्राथमिक विद्यालय करनपुर गांवड़ी, बिजनौर में कार्यकारी प्रधानाध्यापक पद से सेवानिवृत्त हुए। वहीं, मृत्यु के बाद याची ने पारिवारिक पेंशन की मांग की। मृतक ने पहली बीवी से तलाक के बाद दूसरी शादी की थी। सर्विस रिकार्ड में याची का नाम दर्ज कराया था। इसके बावजूद दूसरी बीवी होने के कारण पारिवारिक पेंशन देने से इन्कार कर दिया गया, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।