हाईकोर्ट को गलत जानकारी देना बेसिक शिक्षा अधिकारी औरैया को महंगा पड़ गया। सच्चाई पता चलने पर कोर्ट ने उनको हिरासत में लेने का फरमान सुना दिया है। बीएसए शिव प्रसाद यादव फिलहाल अभिरक्षा में हैं और उनको कैंट थाने में रखा गया है। उनके मामले पर बुधवार को पुन: सुनवाई होगी। मामला रिटायर्ड शिक्षक लक्ष्मीशंकर के बकाए एरियर के भुगतान का है।
लक्ष्मीशंकर का रिटायरमेंट के बाद कुछ देय बकाया था, जिसके भुगतान के लिए उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। बकाया 43 हजार रुपये एरियर भुगतान का हाईकोर्ट ने आदेश दिया था। बीएसए ने इसका पालन नहीं किया तो उन्होंने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल कर दी। अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पंकज नकवी ने बीएसए शिव प्रसाद को स्पष्टीकरण के लिए तलब किया था। बीएसए अदालत में हाजिर हुए और उनकी ओर से कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया गया कि याची का भुगतान कर दिया गया है।
याची के अधिवक्ता ने इस पर आपत्ति की और बताया कि उनको कोई भुगतान प्राप्त नहीं हुआ है। बीएसए भुगतान किए जाने का तत्काल कोई प्रमाण नहीं दे सके। इससे नाराज अदालत ने उनको हिरासत में लेने का आदेश दे दिया। बीएसए के अधिवक्ता श्रवण पांडेय ने बताया कि भुगतान हो चुका है और इससे संबंधित रसीद तथा टोकन नंबर कोषागार से मंगा लिया गया है मगर यह कागजात मिलने में देर होने इसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया जा सका। देर शाम तक प्रमाण उपलब्ध न होने के कारण बीएसए को अभिरक्षा में कैंट थाने में रखा गया है। बुधवार को अदालत के सामने पूरी स्थिति स्पष्ट की जाएगी।