इलाहाबाद। प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद को बड़ी सौगात दे दी है। नैनी को झूंसी से जोड़ने के लिए संगम के ऊपर से नए पुल के निर्माण को अनुमति मिल गई है। 987 करोड़ रुपये से इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने टेंडर भी आमंत्रित कर लिए हैं, जिन्हें 26 अक्तूबर को लखनऊ में खोला जाएगा। पुल का निर्माण नवंबर में शुरू होने की उम्मीद है। इस पुल के बनने के बाद संगम स्नान के लिए आने वालों को फायदा होगा तो हर वर्ष लगने वाले माघ समेत अर्द्धकुंभ और महाकुंभ के दौरान जाम की समस्या से भी छुटकारा मिलेगा। सबसे ज्यादा फायदा नैनी और झूंसी के लोगों को होगा।
प्रदेश सरकार ने संगम पर एलीवेटेड पुल बनाने की घोषणा वर्ष 2013 के महाकुंभ के दौरान की थी। इसके बाद जल निगम की इकाई कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएंडडीएस) ने फोर लेन के इस पुल की डिजाइन तैयार कराई। संगम पर गंगा के ऊपर पुल की लंबाई 1445 मीटर होगी। इसके साथ नैनी में अरैल की ओर नए यमुना पुल से महेश योगी आश्रम तक 3250 मीटर सड़क चार लेन की बनाई जाएगी। इसके लिए अरैल बांध को चौड़ा किया जाएगा। झूंसी में यह पुल हवेलिया स्थित नवाब शरीफ की मजार के पास खत्म होगा। यहां से उल्टा किला होकर शास्त्रीपुल तक 1650 मीटर का फ्लाईओवर बनाया जाएगा, जिस पर 10 लिफ्ट लगेंगी। माघ, अर्द्धकुंभ और महाकुंभ के दौरान बुजुर्ग और महिला स्नानार्थी इन लिफ्टों के जरिए सीधे संगम के पास उतरकर स्नान कर सकेंगे।
पुल के निर्माण में झूंसी की ओर हवेलिया समेत चार से पांच गांव की कुछ जमीन भी अधिग्रहीत की जाएगी। प्रदेश सरकार पुल के निर्माण के लिए 300 करोड़ रुपये पहले ही स्वीकृत कर चुकी है क्योंकि प्रदेश सरकार इस पुल को किसी भी हाल में इसी कार्यकाल में ही पूरी कराना चाहती है। सीएंडडीएस के परियोजना प्रबंधक कैलाश सिंह ने बताया कि पुल के निर्माण के लिए देश-विदेश की कई बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनियों ने बिड डाली है। लखनऊ में 26 अक्तूबर को टेंडर खोले जाएंगे। बताया कि टेंडर के बाद अन्य औपचारिकताएं तेजी से पूरी कर नवंबर में काम शुरू कराने की योजना है।
सीएंडडीएस ने संगम पर पुल की डिजाइन पिछले वर्ष जनवरी-फरवरी में ही तैयार कर ली थी। प्रदेश सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद इसके लिए केंद्रीय पर्यावरण विभाग और केंद्रीय जल बोर्ड से एनओसी का अड़ंगा फंस गया। सीएंडडीएस ने इसके लिए आवेदन किया लेकिन दोनों जगह से एनओसी मिलने में काफी देरी हो गई। पर्यावरण विभाग के बाद पिछले माह केंद्रीय जल बोर्ड से एनओसी मिलने के बाद अब प्रदेश सरकार पुल का निर्माण जल्द शुरू कराने की तैयारी में है।
नैनी से झूंसी को जोड़ने वाले पुल के निर्माण में झूंसी की ओर चार से पांच गांव की कुछ जमीन भी आ रही है। इस जमीन के अधिग्रहण की तैयारी पूरी है। परियोजना प्रबंधक कैलाश सिंह के मुताबिक कास्तकारों को जमीन के एवज में करीब 10 करोड़ रुपये मुआवजा तय किया गया है। इसकी सूचना कास्तकारों को दे दी गई है। टेंडर की प्रक्रिया पूरी होते ही मुआवजा का वितरण कराया जाएगा।
पुल बनने के बाद नैनी से झूंसी जाने-आने वालों को करीब दस किलोमीटर लंबा चक्कर लगाने से छुटकारा मिल जाएगा। शहर को भारी वाहनों से भी छुटकारा मिल जाएगा। अभी तक झूंसी के लोगों को शास्त्री पुल, सोहबतियाबाग, बैरहना, नए यमुना पुल होकर नैनी की ओर जाना पड़ता है। नैनी से झूंसी जाने वाले भी यही करते हैं। वाराणसी से मिर्जापुर और रीवा की ओर जाने वाले भारी वाहन भी इसी मार्ग से गुजरते है लेकिन पुल तैयार होने के बाद यह दूरी महज चार किलोमीटर कर जाएगी।
नैनी से झूंसी को जोड़ने वाला एलीवेटेड पुल नैनी के सड़वा गांव में बनने जा रही सरस्वती हाईटेक टाउनशिप के लिए भी वरदान साबित होगा। पिछले माह मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने टाउनशिप की आधारशिला रखी है। यहां इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट के साथ अन्य काम होंगे। कई बड़ी कंपनियां यहां अपने कारपोरेट कार्यालय खोलने की इच्छुक हैं, जबकि कई नई औद्योगिक इकाइयां भी लगेंगी। ऐसे में इस पुल के बनने से सीधा फायदा उन्हें होगा।