इस क्रम में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व के कई अहम सुझाव सीएम को दिए गए हैं। इसमें संगम के आसपास यज्ञ कराते ब्रह्मा की आदमकद प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव दिया गया है। पौराणिक मान्यता है कि प्रयागराज सृष्टि की प्रथम यज्ञ भूमि रही है। कहा जाता है कि सृष्टि की रचना करने के बाद ब्रह्मा ने इसी संगम की रेती पर पहला यज्ञ किया था। उसकी आध्यात्मिक महिमा को आत्मसात करते हुए सनातनधर्मी माघ मेला, कुंभ और महाकुंभ में संगम की रेती पर महीने भर यज्ञ-अनुष्ठानों का संकल्प लेकर जप, तप और ध्यान करते हैं।
इस पौराणिक संस्कृति से आस्थावानों को सीधे जोड़ने के लिए ब्रह्मा की मूर्ति महाकुंभ से पहले लगाने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही कुमारिल भट्ट का भस्म होना और रामायण लिखते वाल्मीकि की भी मूर्तियां महाकुंभ की शोभा बनेंगी। आदि शंकराचार्य और मीमांसा के प्रकांड विद्वान कुमारिल भट्ट के शास्त्रार्थ को भी प्रतिमाओं में उकेरने की योजना है। महाकुंभ से पहले ब्रह्मा, वाल्मीकि और कुमारिल भट्ट की प्रतिमाओं के रूप में प्रयागराज की संस्कृति को प्रदर्शित करने की योजना को साकार करने की दिशा में काम शुरू हो गया है।
प्रयागराज की संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए ब्रह्मा, वाल्मीकि और कुमारिल भट्ट की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विस्तार से चर्चा हुई है। इस आशय का प्रस्ताव भी भेज दिया गया है। - गणेश केसरवानी, महापौर, प्रयागराज