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ज्योतिष्पीठ की भूमि के लिए वासुदेवानंद और स्वरूपानंद दोनों ने किया दावा

Sat, 05 Dec 2020 09:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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prayagraj news : शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद और स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती। - फोटो : prayagraj
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माघ मेला में भूमि सुविधाओं के लिए घमासान शुरू हो गया है। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के नाम की भूमि सुविधा के लिए राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य जगद्गुरु वासुदेवानंद सरस्वती और द्वारिका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती दोनों की ओर से मेला प्रशासन के समक्ष दावा ठोंक दिया गया है।
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माघ मेला प्रशासन को भेजे पत्र में स्वामी वासुदेवानंद की ओर से परंपरा का हवाला देते हुए कहा गया है कि ज्योतिर्मठ के नाम माघ मेला में भूमि उन्हें आवंटित की जाती रही है। ऐसे में इस पीठ की भूमि सुविधा पर उन्हीं का हक है। जबकि, द्वारिका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के मेला प्रभारी श्रीधरानंद की ओर से ज्योतिष्पीठाधीश्वर की भूमि सुविधा के लिए आवेदन किया गया है। स्वामी स्वरूपानंद की ओर से कहा गया है कि अब तक कुंभ और माघ मेला में उन्हीं को इस पीठ की भूमि मिलती रही है। ऐसे में उनको ही ज्योतिष्पीठ की भूमि सुविधा मिलनी चाहिए।

ज्योतिष्पीठ के स्वामित्व को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। फिलहाल मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इस बीच माघ मेला करीब आने के साथ ही भूमि सुविधाओं के लिए साधु-संतों की सक्रियता बढ़ गई है। इस बार भी माघ मेले में त्रिवेणी मार्ग पर ही चारों शंकराचार्यों के नाम से भूमि आवंटन होने की उम्मीद है।
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इस बीच ज्योतिष्पीठाधीश्वर के नाम पर भूमि सुविधा के आवंटन के लिए जगद्गुरु स्वामी वासुदेवानंद की ओर मेलाधिकारी को पत्र भेज दिया गया है। स्वामी वासुदेवानंद के प्रवक्ता ओंकार नाथ त्रिपाठी ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि ज्योतिष्पीठ की भूमि सुविधा उन्हें ही मिलनी चाहिए। इस पीठ के शंकराचार्य रहे स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती की परंपरा के तहत उनकी गद्दी पर विराजमान होने वाले उनके शिष्य पीठाधीश्वरों के नाम से ही ज्योर्तिमठ जोशी मठ की भूमि सुविधा मिलती रही हैं।

उनके प्रवक्ता का कहना है कि ज्योर्तिमठ की भूमि सुविधा के लिए जगद्गुरु स्वामी वासुदेवानंद की ओर से प्रति वर्ष मांग होती रही है। इस बार भी मांग पत्र भेजा गया है। उधर, शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य और ज्योतिष्पीठ के मेला प्रभारी श्रीधरानंद ने शनिवार को बताया कि भूमि सुविधा के लिए मेला प्रशासन को पत्र दे दिया गया है। हर वर्ष कुंभ और माघ मेला में ज्योतिर्मठ की भूमि सुविधा उनको मिलती रही है। इसलिए कि कोर्ट ने भी उनको ही ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य माना है। स्वामी वासुदेवानंद को कोर्ट ने संन्यासी तक नहीं माना है। ऐसे में उनको ज्योतिष्पीठ की भूमि सुविधा पर दावा करने का हक नहीं है।
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