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प्रयागराज की दोनों सीटें सपा के खाते में, अब दावेदारी के लिए जोड़तोड़

Fri, 22 Feb 2019 02:06 AM IST
विनोद सिंह अविनाशी श्रीवास्तव, अमर उजाला, प्रयागराज
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लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सपा और बसपा के बीच बृहस्पतिवार को सीटों का बंटवारा हो गया। जैसे कि आसार थे, प्रयागराग की दोनों लोकसभा सीटें सपा के खाते में आई हैं। इसी के साथ पार्टी नेताओं में दावेदारी के लिए भी उठापटक शुरू हो गई है। फूलपुर सीट से सांसद नागेंद्र सिंह पटेल की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है लेकिन, धर्मराज सिंह पटेल, रामपूजन पटेल समेत कई अन्य दिग्गज भी दौड़ में बताए जा रहे हैं। वहीं इलाहाबाद सीट पर सपा की ओर से दावेदारी को लेकर रेवती रमण सिंह बनाम अन्य होने की बात कही जा रही है। राज्यसभा सदस्य होने के बावजूद रेवती रमण की सक्रियता को देखते हुए उन्हें भी प्रबल दावेदार माना जा रहा है।
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सपा और बसपा के बीच 75 लोकसभा सीटों पर समझौता हो गया है। पिछले लोकसभा चुनाव में पहले या दूसरे स्थान पर रहने वाले दल को संबंधित सीट देने पर सहमति बनी थी। सीटों के बंटवारे का मुख्य आधार यह फार्मूला ही रहा। इसके तहत मंडल में फूलपुर, इलाहाबाद और कौशाम्बी लोेकसभा सीट सपा के खाते में आई है। वहीं प्रतापगढ़ और फतेहपुर में बसपा चुनाव लड़ेगी। प्रयागराज के दो विधानसभा क्षेत्र प्रतापपुर और हंडिया भदोही लोकसभा में हैं। इस फार्मूले के तहत भदोही सीट भी बसपा के खाते में गई है।

सीट बंटवारे के बाद अब इन दलों के नेताओं के बीच उम्मीदवारी के लिए खींचतान शुरू हो गई है। प्रयागराज की फूलपुर सीट के लिए हुए उपचुनाव में सपा के नागेंद्र सिंह पटेल ने जीत हासिल की थी। यह सीट उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे से खाली हुई थी। इसके अलावा विधानसभा चुनाव में भारी जीत के साथ भाजपा सरकार बनाने में सफल हुई थी। ऐेसे में नागेंद्र की जीत का महत्व और बढ़ गया। इसके अलावा जातीय समीकरण को देखते हुए भी 2019 के चुनाव में सपा की ओर से नागेंद्र की दावेदारी मजबूत बताई जा रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार शीर्ष नेतृत्व ने उनसे तैयारी करने के लिए भी कह दिया है। नागेंद्र का भी कहना है कि  फूलपुर से वे ही सपा उम्मीदवार होंगे। अन्य सीटों पर निर्णय होना अभी बाकी है।
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इलाहाबाद लोकसभा सीट के लिए उम्मीदवार के चयन में पार्टी के वरिष्ठ नेता राज्यसभा सदस्य रेवती रमण सिंह की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि अभी उनकी राज्यसभा की सदस्यता खत्म होेने में तीन साल शेष हैं। इसके बावजूद वह अलग-अलग मुद्दों को लेकर सक्रिय हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि या तो वह खुद दावेदारी करेंगे या पुत्र विधायक उज्ज्वल रमण सिंह के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं। इसके अलावा पिछले चुनाव में भाजपा के श्यामा चरण गुप्त से वह 62 हजार मतों से पीछे रह गए थे। इसमें अकेले शहर दक्षिणी में वह 40 हजार से अधिक मतों से पीछे रह गए। वहीं करछना और मेजा विधानसभा क्षेत्र में उन्होंने बढ़त बनाई थी। इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में रेवती रमण का खासा प्रभाव है। ऐसे में इस सीट के लिए प्रत्याशी के चयन में उनकी बड़ी भूमिका तय मानी जा रही है।

कौशाम्बी सीट पर पिछले चुनाव में सपा के शैलेंद्र दूसरे स्थान पर रहे लेकिन, अब वह रघुराज प्रताप सिंह राजा भइया की पार्टी में शामिल हो गए हैं। ऐसे में इस सीट पर सपा की राजनीति बसपा से आए राष्ट्रीय महासचिव इंद्रजीत सरोज के इर्द गिर्द घूमती दिख रही है। फूलपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव में भी उनकी दावेदारी को लेकर चर्चा थी लेकिन, उन्होंने इंकार कर दिया था। आगामी लोकसभा चुनाव में भी उनका रुख कौशाम्बी में सपा की सियासी दिशा तय करेगा।

उधर, प्रतापगढ़ में कांग्रेस के दिग्गज प्रमोद तिवारी, राजा भइया जैसे कद्दावर नेताओं के बावजूद बसपा के आसिफ निजामुद्दीन सिद्दीकी दूसरे स्थान पर रहे। अपना दल के सांसद हरिवंश सिंह से वह एक लाख 69 हजार मतों से पीछे रह गए थे। इससे पहले 2009 के चुनाव में बसपा के ही शिवाकांत ओझा दूसरे स्थान पर रहे। ऐसे में प्रतापगढ़ में बसपा के लिए प्रत्याशी का चयन आसान नहीं होने जा रहा।

चुनावी शोर और सीटों के बंटवारे पर बसपा के साथ सहमति बनने के बाद सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव शनिवार को पहली बार शहर में होंगे। पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर वह चुनावी तैयारी को धार देंगे तो टिकट के दावेदारों के बीच भी ताकत दिखाने की होड़ होगी। बृहस्पतिवार को पार्टी कार्यालय में हुई बैठक में अखिलेश यादव का जोरदार स्वागत कर चुनावी रणभेरी फूंकने की भी तैयारी है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ भवन में शामिल होने से रोके जाने तथा आंदोलनरत कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज के बाद पूर्व मुख्यमंत्री शनिवार को पहली बार आ रहे हैं। वह लाठीचार्ज में घायल प्रदेश प्रवक्ता ऋचा सिंह से तेलियरगंज स्थित उनके आवास पर मिलेंगे। इसी के साथ अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि से मिलकर भी साधु संतों की सियासत को भी टटोलेंगे। स्थानीय नेताओं बैठक में एमएलसी बासुदेव यादव ने अखिलेश यादव को संतों का प्रिय बताकर यह संकेत भी दे दिया कि इस सियासत में भी भाजपा को टक्कर देने के लिए तैयार हैं। पूर्व मुख्यमंत्री पार्टी कार्यालय में वह अन्य घायलों तथा कार्यकर्ताओं से मिलेंगे। शुक्रवार को हुई बैठक में सांसद नागेंद्र सिंह पटेल, महानगर अध्यक्ष सै.इफ्तेखार हुसैन, पूर्व महानगर अध्यक्ष केके श्रीवास्तव, सै.मो.अस्करी, पूर्व विधायकों आदि नेताओं ने सभी 14 प्रकोष्ठ से जुड़े कार्यकर्ताओं से अखिलेश यादव के जोरदार स्वागत की अपील की।

पिछले साल हुए फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में नागेंद्र सिंह पटेल की जीत से सपा और बसपा कार्यकर्ताओं में उत्साह है लेकिन 2019 आम चुनाव के मुद्दे इससे अलग होंगे। आगामी चुनाव में दोनों दलों के सामने अपने-अपने खाते का वोट डलवाने की चुनौती होगी। पिछले लोकसभा चुनाव में तो कई सीट पर दोनों दलों के वोट मिलाकर भी भाजपा प्रत्याशी से कम रह गए थे। ऐसे में मतों को बूथ तक ले जाने के साथ संयुक्त उम्मीदवार के पक्ष में माहौल बनाने की भी चुनौती होगी।
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2014 के परिणाम एक नजर में
सीट            पार्टी        मिले मत
इलाहाबाद        भाजपा        3,13,772
            सपा        2,51,763
            बसपा        1,62,073
        सपा + बसपा        4,13,836    
000
फूलपुर            भाजपा        5,03,564
            सपा        195,256
            बसपा        1,63,710
        सपा + बसपा        3,58,966
000
कौशाम्बी        भाजपा        3,31,724
            सपा        2,88,824
            बसपा        2,01,322
        सपा + बसपा        490,146
000
प्रतापगढ़        अपना दल    3,75,789
            सपा        1,20,107
            बसपा        2,07,756
        सपा + बसपा        3,27,863
000
उपचुनाव 2018
फूलपुर            भाजपा        2,83,462
            सपा        3,42,922   
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