इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गवाह के बयान और जांच अधिकारी की ओर से प्रस्तुत सबूतों में विरोधाभास पाते हुए हत्या के आरोपी हरस्वरूप को बरी कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि अभियोजन के गवाह ने बयान में कहा था कि गोली लगने के बाद जमीन पर खून नहीं गिरा जबकि जांच अधिकारी ने सबूत के तौर पर खून से सनी मिट्टी पेश की थी।
यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिरला व न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की खंडपीठ ने हर स्वरूप की अपील पर दिया। मथुरा निवासी अपीलकर्ता पर 1984 में कुंवर पाल ने कोसीकला थाने में अपने भाई चरण सिंह की हत्या के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि हर स्वरूप और उसके साथ के लोगों ने चरण सिंह की गोली व लाठी-डंडे से हमला कर हत्या कर दी। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में 1986 में हर स्वरूप को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
खंडपीठ ने गवाहों के बयानों की विश्वसनीयता पर संदेह व्यक्त किया। कोर्ट ने पाया कि गवाह का यह बयान कि जमीन पर खून नहीं गिरा, जांच अधिकारी की ओर से पेश किए गए सबूतों के विपरीत था। अन्य कई बिंदुओं को देखते हुए अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे अपना मामला साबित करने में विफल रहा और हरस्वरूप को बरी कर दिया।