फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अंधविश्वास: जीवित होने की आस में 12 घंटे तक शवों की कराते रहे झाड़-फूंक

Wed, 21 Oct 2020 11:53 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
स्थानीय कस्बे में सर्पदंश से पिता-पुत्र की मौत होने के बाद उनके शवों की 12 घंटे तक अंत्येष्टि नहीं की गई। घरवाले झाड़-फूंक कराते रहे और शव बर्फ में रखवाकर इलाके के ओझा व तांत्रिक से संपर्क साधते रहे। परिजनों का दावा था कि ओझा दोनों को जिंदा कर देंगे। देर शाम तक सारे प्रयास असफल होने पर पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
विज्ञापन


पश्चिमशरीरा थाने के स्थानीय कस्बा निवासी मुकेश (45) पुत्र स्व. धनराज लोक निर्माण विभाग में कर्मचारी था। सोमवार रात मुकेश और उसका एकलौता बेटा दीपू (12) घर के बाहर अलग-अलग चारपाई पर सो रहे थे। भोर में पिता-पुत्र ने सर्प के डसने का शोर मचाया। इसके बाद परिजन और पड़ोसियों को घटना की जानकारी हुई। घरवाले दोनों को अस्पताल ले जाने की बजाय स्थानीय लोगों से झाड़-फूंक कराने लगे। इस बीच पिता-पुत्र की मौत हो गई। घटना की जानकारी पर पहुंचे कोतवाली के उपनिरीक्षक देवव्रत पांडेय दोनों को मृत बताकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजना चाहा।

इस पर परिवार के लोग हंगामा करने लगे। उन लोगों का कहना था कि उन्होंने तांत्रिकों से संपर्क किया है और वे दोनों को जिंदा कर देंगे। इसे लेकर पुलिस पंचनामा भरकर वापस लौट गई। तांत्रिकों के इंतजार में घरवाले पिता-पुत्र के शवों को बर्फ में रखवाकर झाड़-फूंक कराते रहे। मंगलवार शाम छह बजे तक जब तांत्रिक नहीं आए और सारे प्रयास असफल हो गए तो परिजनों ने पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर शव का पोस्टमार्टम कराने को कहा। देर शाम पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें