इलाहाबाद। माहे मुकद्दस के तीसरे जुमे को जामा मस्जिदों सहित शहर की तमाम मस्जिदों में खास नमाज अदा की गई। इसके तहत एक बार फिर रमजान और रोजों की अहमियत, फजीलत बयां की गई। पेश इमामों ने कहा, माहे रमजान में अल्लाह लोगों को अपना मेहमान बनने की दावत दे रहा है। बुराइयों की तरफ से आंखें बंद करो, अपनी जबान से न किसी की बुराई करो और न ही कान से किसी की बुराई सुनो।
शिया जामा मस्जिद चक के इमाम जुमा व जमात सैयद हसन रजा ने कहा, अच्छे रोजेदार बनने के लिए अच्छे आमाल अख्तियार करना जरूरी है। माहे रमजान में कुरान की तिलावत की बहार है। कोशिश हो कि ज्यादा से ज्यादा वक्त कुरानपाक की तिलावत में बीते। इससे घर में बरकत होती है और बलाएं दूर भागती हैं। इमाम जुमा ने शबे कद्र की अहमियत भी बयां की।
शहर काजी मुफ्ती शफीक अहमद शरीफी ने कहा, रोजे हमे नेक इंसान बनने का सलीका सिखाते हैं। जरूरतमंदों और यतीमों का ख्याल करो ताकि हर मुश्किल में तुम्हें भी रास्ता मिले। वहीं जामा मस्जिद चौक, वसीयाबाद मस्जिद, मस्जिद वसीउल्लाह सहित शहर की तमाम मस्जिदों में जुमे की नमाज के दौरान तीसरे अशरे की फजीलतें बयां की गईं।
वारसी समिति की ओर से शनिवार को नखासकोहना सेंवईमंडी में रोजा इफ्तार का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देवाशरीफ से आए रोजेदारों सहित बड़ी तादाद में सूफी संत आदि शामिल होंगे।